दिल्ली विकास प्राधिकरण का बड़ा फैसला: 2001 से पहले बनी इमारतों के लिए स्ट्रक्चरल सेफ्टी ऑडिट अनिवार्य

दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने गुरुवार, 24 सितंबर 2026 को एक नया आदेश जारी किया है। इस आदेश के तहत 21 मार्च 2001 से पहले बनी इमारतों का स्ट्रक्चरल सेफ्टी ऑडिट कराना अनिवार्य कर दिया गया है। इस नियम का मुख्य उद्देश्य भूकंप जैसी आपदाओं से सुरक्षा बढ़ाना है। यह आदेश उन सभी इमारतों पर लागू होगा जिनकी ऊंचाई 15 मीटर या उससे अधिक है। इसके अलावा, 15 मीटर से कम ऊंचाई वाली ऐसी इमारतें जहां लोगों की भारी भीड़ होती है, उन्हें भी इस दायरे में रखा गया है। इसमें ग्रुप हाउसिंग सोसाइटी, शिक्षण संस्थान, अस्पताल, मॉल और सिनेमा हॉल शामिल हैं।
ऑडिट के नियम और समयसीमा
राजधानी में पुरानी हो रही बुनियादी संरचना और हाल ही में हुई इमारतों के ढलने की घटनाओं को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया गया है, जिसमें सत्य निकेतन की घटना भी शामिल है जिसमें सात लोगों की मौत हो गई थी। दिल्ली भूकंपीय क्षेत्र चतुर्थ (Seismic Zone IV) में स्थित है जो 5 से 6 तीव्रता के भूकंप के प्रति संवेदनशील है। भूकंप से जुड़े प्रावधान आधिकारिक रूप से 2001 में दिल्ली के बिल्डिंग उपनियमों में शामिल किए गए थे। भवन मालिकों और कब्जाधारियों को सार्वजनिक नोटिस के तीन महीने के भीतर स्ट्रक्चरल ऑडिट पूरा करना होगा और इसका सारा खर्च खुद उठाना होगा।
इंजीनियरों से जांच और कार्रवाई
ये ऑडिट केवल उन्हीं स्ट्रक्चरल इंजीनियरों द्वारा किए जाने चाहिए जो नगर निगम (MCD), सरकारी एजेंसियों या मान्यता प्राप्त सरकारी संस्थानों में सूचीबद्ध हैं। ऑडिट के बाद मालिकों को जरूरी रेट्रोफिटिंग या सुधारात्मक उपाय करने होंगे। DDA ने स्पष्ट किया है कि रेट्रोफिटिंग का काम पूरा करने का मतलब अनधिकृत निर्माण को नियमित करना नहीं है। इन सुरक्षा आवश्यकताओं का पालन न करने पर संपत्ति मालिकों के खिलाफ सख्त प्रवर्तन कार्रवाई की जाएगी।