DDA का बड़ा कदम: दिल्ली के 45 जेजे क्लस्टर्स का होगा कायाकल्प, 21 हजार परिवारों को मिलेंगे पक्के घर

दिल्ली की झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले हजारों परिवारों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने शहर के 45 जेजे (JJ) क्लस्टर्स के लिए इन-सीटू पुनर्वास प्रक्रिया की आधिकारिक शुरुआत कर दी है। इस महत्वाकांक्षी योजना के जरिए करीब 21,229 परिवारों को लाभ मिलेगा, जिसका मतलब है कि एक लाख से ज्यादा लोग अब गरिमापूर्ण और पक्के मकानों में रहने का सपना पूरा कर सकेंगे। यह पूरी कवायद मास्टर प्लान दिल्ली (MPD) 2047 के तहत की जा रही है, जिसे केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय ने अधिसूचित किया है।
उपराज्यपाल तरणजीत सिंह संधू के मार्गदर्शन में शुरू की गई यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास' के विजन को साकार करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इस योजना की सबसे खास बात यह है कि लोगों को उनके मौजूदा स्थानों पर या उनके बेहद करीब ही घर दिए जाएंगे, ताकि उनकी रोजी-रोटी और सामाजिक जीवन प्रभावित न हो। करीब 135.74 एकड़ जमीन पर फैला यह प्रोजेक्ट दिल्ली की सूरत बदलने की क्षमता रखता है।
कैसे लागू होगी यह योजना और क्या है रणनीति?
इस विशाल प्रोजेक्ट को जमीन पर उतारने के लिए डीडीए ने एक विस्तृत रणनीति तैयार की है। प्राधिकरण ने तीन ट्रांजैक्शन एडवाइजर्स नियुक्त करने के लिए रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (RFP) जारी किया है। ये सलाहकार 15 प्रोजेक्ट लॉट्स के लिए विस्तृत फिजिबिलिटी रिपोर्ट तैयार करेंगे, जिसमें इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरतों और वित्तीय व्यवहार्यता का आकलन किया जाएगा। उम्मीद है कि एक साल के भीतर ये रिपोर्ट तैयार हो जाएंगी।
पुनर्विकास के इस मॉडल में 'ट्रांसफरेबल डेवलपमेंट राइट्स' (TDR) का इस्तेमाल किया जाएगा। इससे डेवलपर्स को ऊंची इमारतें बनाने की अनुमति मिलेगी, जिससे एक तरफ झुग्गीवासियों का पुनर्वास होगा और दूसरी तरफ नए कमर्शियल और रेजिडेंशियल स्टॉक का निर्माण हो सकेगा।
इन इलाकों में होगा काम: जिन 45 क्लस्टर्स को चुना गया है, उन्हें तीन लॉट्स में बांटा गया है। इनमें कालकाजी, आजादपुर, बडली, विकासपुरी, आनंद पर्वत, पटपड़गंज, झिलमिल और शाहदरा जैसे प्रमुख इलाके शामिल हैं।
यह तो बस एक शुरुआत है। डीडीए का लक्ष्य दिल्ली के 650 से अधिक जेजे क्लस्टर्स में रहने वाले लगभग 17 लाख लोगों का पुनर्वास करना है। इस पहले चरण की सफलता के बाद शहर के अन्य हिस्सों में भी इसी तरह का बदलाव देखने को मिल सकता है।