प्रदूषण पर लगाम: द्वारका और नरेला में DDA ने लागू किए डस्ट कंट्रोल नियम
दिल्ली के द्वारका और नरेला में प्रदूषण रोकने के लिए DDA ने कड़े नियम लागू किए हैं। निर्माण कार्यों पर प्रतिबंध और AI कैमरों से होगी निगरानी।

सर्दियों के मौसम में दिल्ली की हवा को जहरीला होने से बचाने के लिए दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने कमर कस ली है। दिल्ली सरकार के विंटर एक्शन प्लान 2026-27 के तहत द्वारका और नरेला जैसे इलाकों में धूल नियंत्रण के कड़े इंतजाम किए गए हैं। इन इलाकों में धूल उड़ाने वाली गतिविधियों पर पूरी तरह नजर रखी जा रही है ताकि पार्टिकुलेट मैटर के स्तर को कम किया जा सके।
नियमों की बात करें तो 1 नवंबर 2026 से 31 जनवरी 2027 तक किसी भी तरह के बाहरी सिविल निर्माण और तोड़फोड़ (demolition) जैसे कामों पर पाबंदी रहेगी। इतना ही नहीं, सबसे गंभीर समय यानी 10 दिसंबर 2026 से 20 जनवरी 2027 के बीच सभी निर्माण और विध्वंस कार्यों पर पूरी तरह बैन रहेगा। इसके अलावा, केंद्र सरकार के निर्देशों के अनुसार 5 नवंबर से 20 नवंबर 2026 तक पूरे NCR क्षेत्र में निर्माण कार्यों पर रोक रहेगी।
AI कैमरों से होगी निगरानी, लापरवाही पर लगेगा जुर्माना
अब निर्माण स्थलों पर चोरी-छिपे काम करना आसान नहीं होगा। DDA ने निगरानी के लिए AI-सक्षम कैमरों का सहारा लिया है, जो सीधे एक सेंट्रल कमांड एंड कंट्रोल सेंटर से जुड़े हैं। इसके साथ ही CAQM और दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) भी लगातार मॉनिटरिंग कर रही हैं। अगर कोई एजेंसी निर्माण सामग्री को ढकने या पानी के छिड़काव जैसे नियमों का पालन नहीं करती है, तो उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया जाएगा, काम रुकवाया जा सकता है और भारी पर्यावरणीय जुर्माना भी लगाया जाएगा। इस अभियान में दिल्ली जल बोर्ड, NHAI, DMRC और NBCC जैसी एजेंसियां भी शामिल हैं।
सिर्फ पाबंदियां ही नहीं, DDA पर्यावरण को सुधारने के लिए हरियाली पर भी जोर दे रहा है। इस सीजन के लिए तय लक्ष्य का 90% हिस्सा पूरा कर लिया गया है, जिसके तहत 542 पार्कों में 20 लाख से ज्यादा पेड़ और झाड़ियां लगाई गई हैं। साथ ही, सड़कों की धूल को रोकने के लिए मैकेनिकल स्वीपिंग और फुटपाथों की पूरी तरह से पेविंग का काम भी तेजी से किया जा रहा है।