DDA लैंड पूलिंग पॉलिसी: किसानों को जागरूक करने के लिए दिल्ली विकास प्राधिकरण ने शुरू किया अभियान

दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने शहर के विभिन्न गांवों में एक विशेष आउटरीच प्रोग्राम की शुरुआत की है। यह पहल महीने भर चलने वाले 'रिफॉर्म उत्सव' अभियान का हिस्सा है, जो 2 अक्टूबर से शुरू हुआ है। उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू के निर्देशों के बाद, DDA का मुख्य उद्देश्य किसानों, जमीन मालिकों और अन्य हितधारकों को लैंड पूलिंग पॉलिसी और मास्टर प्लान दिल्ली (MPD) 2047 के विकास मॉडलों के बारे में विस्तार से समझाना है।
इस अभियान के तहत अब तक बक्करवाला (जोन K-1), तिगीपुर (जोन P-II) और सुल्तानपुर डबास (जोन N) जैसे गांवों में इंटरैक्टिव सत्र आयोजित किए जा चुके हैं। आने वाले समय में छौला, सरनपुर, नेब सराय, खेड़ा कलां और मुखमेलपुर जैसे इलाकों में भी कैंप लगाए जाएंगे। DDA के मुताबिक, छह प्लानिंग जोन के करीब 105 राजस्व गांवों के लिए आवेदन की खिड़की अभी खुली है, जिसमें लगभग 200 वर्ग किलोमीटर का क्षेत्र शामिल है।
लैंड पूलिंग पॉलिसी के मुख्य नियम और फायदे
MPD-2047 के ढांचे ने लैंड पूलिंग की प्रक्रिया को और अधिक स्पष्ट कर दिया है। अब जमीन इकट्ठा करने के लिए न्यूनतम स्कीम एरिया 20 हेक्टेयर होना अनिवार्य है। इस पॉलिसी के तहत जमीन के वितरण का अनुपात 60:40 रखा गया है। इसका मतलब है कि जमीन मालिकों को 60% जमीन वापस मिलेगी, जिसमें 53% आवासीय, 5% व्यावसायिक और 2% सार्वजनिक या अर्ध-सार्वजनिक उपयोग के लिए होगी।
योजना के अन्य महत्वपूर्ण बिंदु इस प्रकार हैं:
- आवासीय फ्लोर एरिया रेशियो (FAR) 400 तय किया गया है।
- कुल आवास का 15% हिस्सा आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के लिए आरक्षित होगा।
- जुलाई 2026 तक DDA को 7,615 से अधिक आवेदन मिले हैं, जिसके तहत 7,885 हेक्टेयर से ज्यादा जमीन पंजीकृत या पूल की गई है।
- अब तक एक प्लान सैंक्शन हो चुका है और 15 प्लान मैच्योर हो चुके हैं।
प्रक्रिया को और आसान बनाने के लिए DDA अब MPD-2047 को GIS-आधारित डिजिटल मैप के जरिए उपलब्ध कराने पर काम कर रहा है। साथ ही, इन प्रोजेक्ट्स को तेजी से लागू करने के लिए दिल्ली विकास अधिनियम, 1957 में विधायी संशोधन करने की तैयारी है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि सड़क नेटवर्क और जमीन के पार्सल से जुड़ी विस्तृत जानकारी जल्द ही अधिसूचित की जाएगी।