दिल्ली में पुराने मकानों के दिन बहुरे: DDA ने मल्टीस्टोरी बिल्डिंग बनाने की नई redevelopment policy को दी मंजूरी

दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने राजधानी में 50 साल से अधिक पुराने दो मंजिला आवासीय मकानों के पुनर्निर्माण और पुनर्विकास के लिए एक व्यापक policy को औपचारिक रूप से मंजूरी दे दी है। यह नई पहल Master Plan for Delhi 2047 (MPD-2047) का एक मुख्य हिस्सा है, जिसका उद्देश्य Master Plan Delhi-1962 के तहत बने पुराने और जर्जर हो चुके आवासीय मकानों की संरचनात्मक समस्याओं को दूर करना है।
यह policy उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू की अध्यक्षता में हुई DDA बोर्ड की बैठक में पारित की गई। DDA अधिकारियों के अनुसार, यह कदम 'खराब स्थिति' में रह रहे निवासियों की लंबे समय से चली आ रही मांग को पूरा करता है। इस नए ढांचे के तहत योग्य दो मंजिला प्रॉपर्टी के मालिकों को खाली प्लॉट की तरह ही redevelopment के अधिकार मिलेंगे, बशर्ते वे आधुनिक बिल्डिंग नियमों, FAR (Floor Area Ratio), बिल्डिंग की ऊंचाई और सुरक्षा मानकों का पालन करें।
प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए DDA ने Unified Building Bye-Laws 2016 में संशोधन का प्रस्ताव रखा है। इसके तहत दिल्ली जल बोर्ड, दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति और वन विभाग जैसी एजेंसियों से पहले से No-Objection Certificate (NOC) लेने की जरूरत को खत्म कर दिया जाएगा। शुरुआत में इसे नाराना विहार, ग्रीन पार्क और लाजपत नगर जैसे इलाकों में लागू किया जाएगा, और बाद में इसका विस्तार पूरे शहर में किया जाएगा जिससे लगभग 30 से 40 लाख निवासियों को फायदा मिल सकता है।
नए दिशा-निर्देशों के तहत मकान मालिकों को कन्वर्जन चार्ज, स्क्रूटनी फीस और बेटरमेंट लेवी चुकानी होगी। इस policy में 25 से 60 वर्ग मीटर कारपेट एरिया वाले किफायती घरों, वर्कर हाउसिंग, शेयर किए गए dormitorio और स्टूडेंट हॉस्टल के निर्माण के लिए प्रोत्साहन भी शामिल है। इस मंजूर की गई policy और Master Plan for Delhi 2047 को अंतिम समीक्षा और औपचारिक अधिसूचना के लिए Union Ministry of Housing and Urban Affairs के पास भेज दिया गया है।