विपक्ष की हिरासत पर भड़के दानिश अली, CEC ज्ञानेश कुमार को हटाने और जेल भेजने की मांग

कांग्रेस नेता कुंवर दानिश अली ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा की हिरासत को लेकर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोला है। 'लोकतंत्र बचाओ' मार्च के दौरान हुई इस कार्रवाई को उन्होंने पूरी तरह गलत बताया है। दानिश अली ने आरोप लगाया कि निर्वाचन सदन की ओर बढ़ रहे विपक्षी नेताओं के साथ पुलिस ने बर्बरता की, जिसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
दानिश अली ने कड़े शब्दों में कहा कि उनकी पार्टी तब तक चुप नहीं बैठेगी, जब तक मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को उनके पद से हटाया नहीं जाता और उन्हें जेल में नहीं डाला जाता। उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम को लोकतंत्र के लिए खतरा बताया है।
वोट चोरी और पुलिस की बर्बरता का आरोप
विपक्षी नेताओं का यह विरोध प्रदर्शन मतदाता सूचियों के विशेष गहन संशोधन (SIR) में कथित अनियमितताओं और 'वोट चोरी' के आरोपों को लेकर था। 6 अक्टूबर को यह विरोध प्रदर्शन तब और तेज हो गया जब दिल्ली पुलिस ने राहुल गांधी और प्रियंका गांधी सहित INDIA गठबंधन के 300 से अधिक सदस्यों को हिरासत में ले लिया। अशोक गहलोत जैसे वरिष्ठ नेताओं ने पुष्टि की है कि हिरासत के दौरान सांसदों के साथ धक्का-मुक्की और शारीरिक दुर्व्यवहार किया गया।
इस मामले में दानिश अली ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को चेतावनी देते हुए कहा कि राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ पुलिस बल का इस्तेमाल करना 'आग से खेलने' जैसा है।
दूसरी ओर, सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की याचिकाओं पर सुनवाई की, लेकिन फिलहाल उन्हें निलंबित करने के लिए कोई अंतरिम आदेश जारी नहीं किया। हालांकि, अदालत ने चयन समिति की स्वतंत्रता पर सवाल उठाए हैं और चुनाव आयोग से फॉर्म 6 और SIR प्रक्रियाओं में किए गए बदलावों के रिकॉर्ड मांगे हैं। संवैधानिक विशेषज्ञों का मानना है कि सीईसी को हटाने के लिए संसदीय महाभियोग की प्रक्रिया जरूरी होती है, जबकि सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया है कि चुनाव आयोग के फैसले आम सहमति या बहुमत से होने चाहिए।