पंजाब सीएम भगवंत मान वीडियो मामला: गुड़गांव कोर्ट से साइबर एक्सपर्ट अंकित भारद्वाज को मिली जमानत

गुरुग्राम कोर्ट का बड़ा फैसला
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान से जुड़े वीडियो मामले में फर्जी फॉरेन्सिक रिपोर्ट तैयार करने के आरोपों का सामना कर रहे 24 वर्षीय साइबर एक्सपर्ट अंकित भारद्वाज को 30 जुलाई 2026 को गुरुग्राम कोर्ट से रेगुलर जमानत मिल गई है। इस विकास की जानकारी The Indian Express द्वारा 1 जुलाई 2026 को दी गई थी। अंकित भारद्वाज, जो नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) में एक पूर्व एड हॉक कर्मचारी रह चुके हैं, को 23 जून 2026 को हिरासत में लिया गया था। इसके बाद फर्जी फॉरेन्सिक रिपोर्ट तैयार करने की शिकायत मिलने पर उन्हें और एक अन्य व्यक्ति अरुण महेंद्रू को 24 जून 2026 को औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया गया था।
कोर्ट की मुख्य टिप्पणियां और जमानत का आधार
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सुदीप गोयल ने जमानत देते हुए यह फैसला सुनाया कि फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) रिपोर्ट के बिना संगठित अपराध के आरोप नहीं लगाए जा सकते हैं। अदालत ने जांच के दौरान पुलिस द्वारा जुटाए गए सहायक दस्तावेजों को पेश करने में असफलता पर भी प्रकाश डाला। कोर्ट ने यह भी观察 किया कि किसी डिजिटल लैब के भौतिक कार्यालय पते का न होना स्वचालित रूप से उसे फर्जी इकाई नहीं बनाता है। जज ने निष्कर्ष निकाला कि भारद्वाज को जेल में रखने से कोई उद्देश्य पूरा नहीं होगा क्योंकि ट्रायल की प्रक्रिया लंबी होगी, और यह नोट किया कि जांच एजेंसी द्वारा यह स्वीकार किए जाने पर कि फॉरेंसिक रिपोर्ट अभी प्राप्त नहीं हुई है, एक साक्ष्य कड़ी गायब थी।
बचाव पक्ष के तर्क और पुलिस का पक्ष
भारद्वाज के बचाव पक्ष के वकील, एडवोकेट डॉ. राजेश सभरवाल ने यह तर्क दिया कि उनके मुक्किल को झूठा फंसाया गया है और औपचारिक गिरफ्तारी से पहले उन्हें अवैध हिरासत में रखा गया था। उन्होंने यह भी जोर देकर कहा कि पर्याप्त सबूत के बिना संगठित अपराध के प्रावधान लागू किए गए। इससे पहले 24 जून 2026 को गुरुग्राम एसीपी क्राइम नवीन शर्मा के बयानों से संकेत मिला था कि आरोपियों ने दावा किया था कि उन्हें उनके काम के लिए 10 लाख रुपये का भुगतान किया गया था और एक पड़ोसी राज्य के अधिकारियों की संलिप्तता का सुझाव दिया था। शर्मा ने यह भी कहा था कि भारद्वाज की रिपोर्ट से जुड़ी 'Cipher Sentinel lab' और महेंद्रू की रिपोर्ट से जुड़ी 'Cyber Yaan lab' का कोई भौतिक अस्तित्व नहीं है या वे किसी सरकारी विभाग में पंजीकृत नहीं हैं, जिस बिंदु को अदालत ने बाद में अपने जमानत आदेश में कमतर आंका।