दिल्ली के कमर्शियल इलाकों में प्रदर्शनों पर रोक की मांग, CTI ने पुलिस कमिश्नर को लिखा पत्र
चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री ने दिल्ली पुलिस से कनॉट प्लेस और जंतर मंतर जैसे इलाकों में रैलियों पर रोक लगाने की मांग की है।

राजधानी दिल्ली के व्यस्त व्यापारिक क्षेत्रों में होने वाले विरोध प्रदर्शनों और रैलियों से कारोबारियों को भारी नुकसान हो रहा है। इस समस्या को देखते हुए चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने दिल्ली पुलिस कमिश्नर से एक औपचारिक अपील की है कि शहर के प्रमुख कमर्शियल इलाकों में रैलियों, प्रदर्शनों और मार्च के लिए अनुमति न दी जाए।
CTI के चेयरमैन बृजेश गोयल के नेतृत्व में व्यापारिक संगठन ने विशेष रूप से कनॉट प्लेस, जंतर मंतर, रामलीला मैदान, इंडिया गेट और राजघाट जैसे इलाकों का जिक्र किया है। संगठन का कहना है कि इन जगहों पर होने वाली भीड़भाड़ और प्रदर्शनों की वजह से व्यापारिक हितों को गंभीर चोट पहुँच रही है।
दिवाली सीजन में हुआ करोड़ों का नुकसान
व्यापारियों का दावा है कि हालिया राजनीतिक गतिविधियों के कारण आर्थिक रूप से काफी नुकसान हुआ है। CTI के मुताबिक, 1 नवंबर 2026 को रामलीला मैदान में 'इंडिया' गठबंधन द्वारा आयोजित 'चलो दिल्ली' रैली के कारण करीब 80% दुकानें बंद रहीं, जिससे लगभग 2.5 लाख प्रतिष्ठान प्रभावित हुए। दिवाली की खरीदारी के पीक सीजन में हुए इन प्रदर्शनों की वजह से व्यापारियों को 10,000 करोड़ से 12,000 करोड़ रुपये के बीच के नुकसान का अनुमान लगाया गया है।
CTI ने इस संबंध में प्रधानमंत्री और कांग्रेस नेतृत्व सहित राहुल गांधी और सोनिया गांधी को भी पत्र लिखा है। संगठन ने सुझाव दिया है कि प्रदर्शनों के लिए कमर्शियल हब से दूर एक स्थायी 'प्रोटेस्ट जोन' बनाया जाना चाहिए, जिसके लिए उन्होंने बुराड़ी जैसे इलाकों का प्रस्ताव रखा है।
व्यापारिक संगठन ने सरकार से मांग की है कि 1,000 से अधिक लोगों की भागीदारी वाले प्रदर्शनों के लिए नए दिशा-निर्देश तय किए जाएं, ताकि सभा करने के अधिकार और आजीविका के अधिकार के बीच संतुलन बना रहे। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने 1 नवंबर के कार्यक्रम के लिए कानून-व्यवस्था, सीसीटीवी निगरानी और ट्रैफिक मैनेजमेंट के प्रोटोकॉल का पालन करते हुए एनओसी (NOC) दे दी थी। फिलहाल, अधिकारियों की ओर से प्रदर्शनों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का कोई आदेश जारी नहीं हुआ है।