जज पर टिप्पणी करना पड़ा भारी, CJP लीगल हेड रतना सिंह पर आपराधिक अवमानना की कार्रवाई मंजूर

जज पर सोशल मीडिया पर टिप्पणी करना पड़ा भारी, CJP लीगल हेड रतना सिंह के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही को मिली मंजूरी।

Kittu Kumari4 November 20261 min read0 viewsDelhi Local
जज पर टिप्पणी करना पड़ा भारी, CJP लीगल हेड रतना सिंह पर आपराधिक अवमानना की कार्रवाई मंजूर

दिल्ली सरकार के एडिशनल स्टैंडिंग काउंसिल (क्रिमिनल) अमोल सिन्हा ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की लीगल हेड रतना सिंह के खिलाफ आपराधिक अवमानना (Criminal Contempt) की कार्यवाही शुरू करने की सहमति दे दी है। इस मंजूरी के बाद अब वकील कौशिक चटर्जी दिल्ली हाई कोर्ट में रतना सिंह के खिलाफ अवमानना याचिका दायर कर सकेंगे। यह पूरा मामला एक सोशल मीडिया पोस्ट से शुरू हुआ, जिसने न्यायिक मर्यादा पर सवाल खड़े कर दिए।

क्या है पूरा मामला?

विवाद की जड़ साकेत कोर्ट में हुई एक सुनवाई है, जिसकी अध्यक्षता सीजेएम अभिनव पांडे कर रहे थे। रतना सिंह ने एक याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि दिल्ली पुलिस ने उन्हें अवैध रूप से हिरासत में रखा और सीईओ ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने से रोका। उन्होंने पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की मांग की थी, लेकिन कोर्ट ने उनकी इस याचिका को खारिज कर दिया।

कोर्ट के इस फैसले के बाद रतना सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट साझा किया। इस पोस्ट में उन्होंने जज पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने किसी 'ओवरलॉर्ड' या 'मास्टर' के इशारे पर काम किया है।

इस पोस्ट के बाद वकील कौशिक चटर्जी ने 14 और 28 अक्टूबर को शिकायत दर्ज कराई। उनका तर्क था कि इस तरह की टिप्पणी से न्यायिक अधिकारी की स्वतंत्रता और निष्पक्षता पर सवाल उठाए गए हैं, जिससे अदालत की गरिमा को ठेस पहुंची है। मामले की समीक्षा के बाद 2 नवंबर को अमोल सिन्हा ने पाया कि यह पोस्ट 'कंटेंप्ट ऑफ कोर्ट्स एक्ट, 1971' की धारा 15(2) के दायरे में आता है, जिसके आधार पर आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू करने के पर्याप्त आधार मौजूद हैं।

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