सीआर पार्क की दुर्गा पूजा अब सामुदायिक उत्सव से बढ़कर बनी बड़ा कमर्शियल इवेंट

दिल्ली का चितरंजन पार्क, जिसे अक्सर 'मिनी कोलकाता' कहा जाता है, एक बार फिर अपनी मशहूर दुर्गा पूजा की तैयारियों में जुटा है। लेकिन इस बार की चर्चा सिर्फ श्रद्धा और परंपरा तक सीमित नहीं है। यह उत्सव अब एक बड़े कमर्शियल इवेंट का रूप ले चुका है। कभी घर-घर जाकर चंदा इकट्ठा करने वाले सामुदायिक आयोजनों की जगह अब बड़े कॉर्पोरेट स्पॉन्सरशिप ने ले ली है, जिसने इस आयोजन के पैमाने को पूरी तरह बदल दिया है।
उत्तर भारत में दुर्गा पूजा का सबसे बड़ा केंद्र माने जाने वाले इस इलाके में बी ब्लॉक के कोऑपरेटिव ग्राउंड, के ब्लॉक के मेला ग्राउंड, Nabapalli, पॉकेट 40 और काली मंदिर सोसाइटी जैसे बड़े कमेटियां इस आयोजन की कमान संभालते हैं। अनुमान है कि पांच दिनों के इस उत्सव में करीब 10 लाख से ज्यादा लोग शिरकत करेंगे। इस आयोजन का व्यावसायिक स्तर इस बात से समझा जा सकता है कि ब्रांड्स के लिए स्पॉन्सरशिप पैकेज 35 हजार रुपये के छोटे स्टॉल से शुरू होकर 1.5 लाख से 45 लाख रुपये तक के बड़े पैकेज तक जाते हैं। हालांकि, इस बढ़ते बाजारीकरण ने कुछ निवासियों को चिंतित कर दिया है, जिन्हें लगता है कि त्योहार की पारंपरिक आत्मा कहीं खो रही है।
कला और बुनियादी ढांचे की चुनौतियां
उत्सव की तैयारी केवल पंडालों तक सीमित नहीं है। काली मंदिर सोसाइटी और चंद्रलोक सिनेमा के पास स्थित उनकी वर्कशॉप हर साल दिल्ली-NCR, भारत और विदेशों के लिए 800 से ज्यादा मूर्तियां तैयार करती हैं। इन मूर्तियों की कीमत आमतौर पर 40 हजार से 80 हजार रुपये के बीच होती है, लेकिन खास तौर पर तैयार किए गए बड़े इंस्टॉलेशन की कीमत 10 लाख रुपये से भी ऊपर जा सकती है। वहीं, 2026 के लिए कोऑपरेटिव ग्राउंड दुर्गा पूजा समिति ने स्थिरता (sustainability) पर जोर देते हुए जूट और बांस के उपयोग का फैसला किया है।
बढ़ती भीड़ के बीच नागरिक समस्याएं भी खड़ी हो रही हैं। चितरंजन पार्क सीनियर सिटीजन्स वेलफेयर सोसाइटी ने दिल्ली सरकार से अपील की है कि सावित्री सिनेमा के पास बन रहे दूसरे फ्लाईओवर के काम को त्योहारों के बाद तक के लिए टाल दिया जाए। निवासियों का तर्क है कि दुर्गा पूजा, दशहरा, लक्ष्मी पूजा, काली पूजा और छठ पूजा के दौरान लाखों की भीड़ उमड़ती है, जिससे सावित्री से धौला कुआं तक भारी जाम लग सकता है और पैदल चलने वालों के लिए खतरा बढ़ सकता है।
सांस्कृतिक जुड़ाव को बनाए रखने के लिए 'DelhiByFoot' और 'O'Pause Travel Experiences' जैसे समूहों ने हेरिटेज वॉक का आयोजन भी किया, ताकि लोग इस इलाके की बंगाली जड़ों और मूर्ति बनाने की कला को करीब से समझ सकें। इस साल महालया 10 अक्टूबर को है, जबकि मुख्य पूजा 16 अक्टूबर (महा षष्ठी) से शुरू होकर 20 अक्टूबर (विजयादशमी) तक चलेगी।