नई दिल्ली में 30 सितंबर को होगा ईवोल्व कॉन्क्लेव, भारत में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के भविष्य पर होगी चर्चा

दिल्ली में सेंटर ऑफ पॉलिसी रिसर्च एंड गवर्नेंस (CPRG) द्वारा 30 सितंबर को इलेक्ट्रिक मोबिलिटी पर 'ईवोल्व' (EVolve) कॉन्क्लेव का आयोजन किया जाएगा। इस सम्मेलन में नीति निर्माता, सरकारी अधिकारी, उद्योग जगत के नेता, शिक्षाविद् और विशेषज्ञ शामिल होंगे। यह कॉन्क्लेव भारत में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के भविष्य और देश के व्यापक ऊर्जा परिवर्तन के बीच संबंधों पर चर्चा करेगा। CPRG के एक बयान के अनुसार, जैसे-जैसे भारत अपने 2070 के नेट-जीरो लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है, ऊर्जा और गतिशीलता परिवर्तन की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि ये दोनों प्रणालियाँ एक साथ कैसे विकसित होती हैं। इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) को तेजी से अपनाने से पावर ग्रिड पर नई मांगें पैदा होंगी, जबकि नवीकरणीय ऊर्जा का विस्तार स्वच्छ गतिशीलता को तेज करने का अवसर प्रदान करता है।
CPRG के निदेशक रामानंद ने कहा कि भारत के इलेक्ट्रिक मोबिलिटी परिवर्तन को व्यापक ऊर्जा परिवर्तन से अलग करके नहीं देखा जा सकता है। EV अपनाने की गति के साथ-साथ पावर ग्रिड, चार्जिंग नेटवर्क, विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र और वित्तपोषण वास्तुकला की इस बदलाव का समर्थन करने की क्षमता भी मायने रखती है। उन्होंने कहा कि असली चुनौती यह सुनिश्चित करना है कि परिवर्तन के ये विभिन्न हिस्से अलग-अलग न चलें, बल्कि एक-दूसरे को मजबूत करें। CPRG के अनुसार, यह कॉन्क्लेव भारत के ऊर्जा और गतिशीलता परिदृश्य को आकार देने वाले प्रमुख सक्षमकर्ताओं की जांच करेगा।
चर्चाओं में ग्रिड की तैयारी, चार्जिंग बुनियादी ढांचे, विनिर्माण और तकनीकी नवाचार के साथ-साथ वित्त और कार्यबल विकास की भूमिका का पता लगाया जाएगा। इस आयोजन में दिल्ली सरकार के उपराज्यपाल सरदार तरनजीत सिंह संधू मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। विचार-विमर्श में इस बात पर भी विचार किया जाएगा कि नीतिगत ढांचा, निवेश प्राथमिकताएं और संस्थानों के बीच समन्वय कैसे उभरती हुई बाधाओं को दूर करने में मदद कर सकता है।
ईवोल्व को एक ऐसे मंच के रूप में परिकल्पित किया गया है जो चर्चा को व्यक्तिगत क्षेत्रीय चुनौतियों से आगे ले जाता है। यह सम्मेलन भारत के परिवहन और ऊर्जा प्रणालियों के एक साथ विकास की बड़ी और महत्वपूर्ण दिशा तय करेगा। उम्मीद है कि ये चर्चाएं अधिक एकीकृत ऊर्जा-मोबिलिटी नीति एजेंडे में योगदान देंगी और संबंधित मंत्रालयों, विभागों और भाग लेने वाले हितधारकों के लिए कार्रवाई योग्य सिफारिशें तैयार करेंगी। कॉन्क्लेव सरकार, उद्योग, वित्तविदों और नागरिक समाज के बीच साझेदारी को भी प्रोत्साहित करेगा ताकि दोनों क्षेत्रों में बेहतर समन्वय का समर्थन किया जा सके।