नाम प्लेट छिपाना और मनमानी हिरासत: दिल्ली पुलिस के रवैये पर अमित शाह से हस्तक्षेप की मांग

सीपीआई सांसद पी. संदोश कुमार ने दिल्ली पुलिस के व्यवहार को लेकर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को एक पत्र लिखकर मांग की है कि पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारियों के साथ की जा रही हिंसा और मनमानी हिरासत के मामलों में तुरंत हस्तक्षेप किया जाए। सांसद का आरोप है कि दिल्ली पुलिस शांतिपूर्ण प्रदर्शनों को संभालने के बजाय हिंसा का सहारा ले रही है।
संदोश कुमार ने अपने पत्र में विशेष रूप से इस बात का जिक्र किया कि पुलिसकर्मी प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग करने या उन्हें हिरासत में लेने से पहले अपनी पहचान बताने वाली नेम प्लेट या बैज को हटा देते हैं या छिपा लेते हैं। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और दिल्ली पुलिस के स्टैंडिंग ऑर्डर नंबर 51 का हवाला देते हुए कहा कि ड्यूटी के दौरान पहचान पत्र का दिखना अनिवार्य है, ताकि जवाबदेही तय की जा सके।
जंतर मंतर पर प्रदर्शन और फेशियल रिकग्निशन का मुद्दा
सांसद ने जंतर मंतर पर हुए हालिया प्रदर्शनों का उल्लेख किया, जो नीट पेपर लीक और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली जैसे मुद्दों पर थे। उन्होंने आरोप लगाया कि 20 जुलाई को भी इसी तरह की घटनाएं हुई थीं, जहां सादे कपड़ों में आए पुलिसकर्मियों ने प्रदर्शनकारियों के साथ सख्ती की थी। इसके साथ ही, उन्होंने जंतर मंतर पर फेशियल रिकग्निशन टेक्नोलॉजी (चेहरा पहचानने वाली तकनीक) के इस्तेमाल पर भी सवाल उठाए हैं।
संदोश कुमार ने पत्र में कहा कि लोकतांत्रिक असहमति को ब्रिटिश राज की पुलिस जैसी कार्यशैली से नहीं दबाया जा सकता। उन्होंने गृह मंत्रालय से आग्रह किया है कि नागरिकों के शांतिपूर्ण विरोध के संवैधानिक अधिकार की रक्षा की जाए और पुलिस को स्पष्ट निर्देश दिए जाएं कि वे लोगों के साथ दुश्मनों जैसा व्यवहार न करें।
उन्होंने इस पूरे मामले की समयबद्ध जांच की मांग की है, जिसमें बल प्रयोग, मनमानी हिरासत और बिना पहचान पत्र के तैनात पुलिसकर्मियों की भूमिका की जांच शामिल हो। गौरतलब है कि 2 और 3 अक्टूबर को जंतर मंतर पर हुए प्रदर्शनों के बाद दिल्ली पुलिस ने तीन एफआईआर दर्ज की हैं और कई लोगों को हिरासत में लिया है।