यमुना के नालों में कचरे और सीवेज का अंबार, CPCB की रिपोर्ट में दिल्ली की डराने वाली स्थिति आई सामने

देश की राजधानी दिल्ली की जीवनरेखा कही जाने वाली यमुना नदी अब प्रदूषण के गंभीर संकट से जूझ रही है। सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (CPCB) द्वारा मई 2025 से अप्रैल 2026 के बीच किए गए एक विस्तृत सर्वेक्षण में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, यमुना में गिरने वाले नालों में ठोस कचरे और अनुपचारित सीवेज की मात्रा खतरनाक स्तर तक बढ़ गई है, जिससे नदी का अस्तित्व खतरे में है।
CPCB की जांच में पाया गया कि यमुना में गिरने वाले नालों के 32 स्थानों पर भारी मात्रा में ठोस कचरा जमा है। इसके अलावा, 11 ऐसे नाले मिले हैं जहां सीवेज टैपिंग की व्यवस्था या तो बेहद खराब है या पिछले कई महीनों से पूरी तरह बंद पड़ी है। रिपोर्ट में 12 प्रमुख 'पॉल्यूशन हॉटस्पॉट्स' की पहचान की गई है, जिनमें पालम, रमेश नगर, नांगलोई, मुंगेशपुर, शाहदरा, शाहदरा लिंक रोड और साहिबाबाद जैसे इलाके शामिल हैं। इन जगहों पर औद्योगिक कचरा और बिना ट्रीटमेंट वाला सीवेज सीधे नदी में मिल रहा है।
साहिबाबाद और मोती नगर में प्रदूषण का स्तर सबसे ज्यादा
रिपोर्ट के आंकड़े डराने वाले हैं। साहिबाबाद नाले (शहीद नगर मेट्रो स्टेशन के पास) में बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड (BOD) का औसत स्तर 250 mg/L से अधिक पाया गया, जो बेहद चिंताजनक है। वहीं, न्यू मोती नगर ड्रेन आउटफ्लो में BOD 232.4 mg/L और केमिकल ऑक्सीजन डिमांड (COD) 551.8 mg/L दर्ज की गई। एक और बड़ी समस्या सहिबी नदी नेटवर्क में देखी गई, जहां नजफगढ़ झील के बाद पानी की गुणवत्ता में भारी गिरावट आती है, जिसका मुख्य कारण गुरुग्राम (हरियाणा) से आने वाला प्रदूषित पानी बताया गया है।
दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) के ताज़ा आंकड़ों ने इस संकट की पुष्टि की है। सितंबर 2026 में ISBT ब्रिज के पास BOD का स्तर पिछले साल के 8 mg/l से बढ़कर 30 mg/l हो गया है, जबकि फेकल कोलीफॉर्म की मात्रा 35,000 MPN/100 ml तक पहुंच गई है। वहीं ITO ब्रिज के पास भी प्रदूषण का स्तर मानक सीमा (3 mg/l) से कहीं ज्यादा है। अधिकारियों का मानना है कि सीवेज का ओवरलोड, फैक्ट्रियों द्वारा अवैध रूप से कचरा डालना और विभागों के बीच तालमेल की कमी इस बदहाली की मुख्य वजह है।
इस गंभीर स्थिति को देखते हुए दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने 18 अक्टूबर 2026 को 'चलो यमुना मेगा क्लीनलीनेस ड्राइव' चलाने का ऐलान किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अनुपचारित सीवेज ही सबसे बड़ी चुनौती है। इस अभियान के लिए MCD, दिल्ली जल बोर्ड (DJB) और DDA को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे नालों से ठोस कचरा हटाएं और अवैध डंपिंग को पूरी तरह रोकें।