प्रदूषण पर सख्ती: CPCB ने उत्तर भारत की 648 औद्योगिक इकाइयों को बंद करने का दिया आदेश

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने दिल्ली, हरियाणा, यूपी और राजस्थान की 648 फैक्ट्रियों को बंद करने का निर्देश दिया है। जानें क्या है पूरा मामला।

Kittu Kumari22 October 20262 min read0 viewsNational
प्रदूषण पर सख्ती: CPCB ने उत्तर भारत की 648 औद्योगिक इकाइयों को बंद करने का दिया आदेश

पर्यावरण की सुरक्षा और प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) ने एक बड़ा कदम उठाया है। बोर्ड ने दिल्ली, राजस्थान, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में स्थित कुल 648 औद्योगिक इकाइयों को तुरंत बंद करने और सील करने का निर्देश जारी किया है। यह सख्त कार्रवाई उन फैक्ट्रियों के खिलाफ की गई है, जो ऑनलाइन उत्सर्जन निगरानी प्रणाली (OCEMS) के नियमों का पालन करने में विफल रहीं।

दरअसल, नियमों के मुताबिक औद्योगिक इकाइयों के लिए यह अनिवार्य है कि उनके ऑनलाइन उत्सर्जन डेटा की उपलब्धता कम से कम 85% रहे। CPCB ने जब 2,291 उद्योगों की निगरानी की, तो उनमें से 648 इकाइयां इस मानक पर खरी नहीं उतरीं। इन इकाइयों में दिल्ली की 10, राजस्थान की 80, हरियाणा की 298 और उत्तर प्रदेश की 260 फैक्ट्रियां शामिल हैं।

इन सेक्टरों पर गिरी गाज और क्या है OCEMS

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इस कार्रवाई की जद में कई बड़े औद्योगिक क्षेत्र आए हैं, जिनमें मुख्य रूप से टेनरियां, शुगर मिलें, थर्मल पावर प्लांट, फूड प्रोसेसिंग प्लांट, टेक्सटाइल मिलें और मेटल प्रोसेसिंग इंडस्ट्री शामिल हैं। इसके साथ ही कॉमन वेस्ट ट्रीटमेंट फैसिलिटीज़ को भी इस सूची में रखा गया है।

OCEMS एक ऐसी तकनीक है जिसके जरिए औद्योगिक वायु उत्सर्जन और अपशिष्ट जल के डिस्चार्ज का रियल-टाइम डेटा रेगुलेटर्स को मिलता है। जब भी प्रदूषण का स्तर तय सीमा से ऊपर जाता है, तो यह सिस्टम ऑटोमैटिक अलर्ट भेजता है। उत्तर भारत में वायु प्रदूषण का एक बड़ा हिस्सा (लगभग 20%) औद्योगिक उत्सर्जन से आता है, जिसे नियंत्रित करना सरकार की प्राथमिकता है।

केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के तहत काम कर रहे CPCB ने साफ किया है कि ये बंदी आदेश तब तक लागू रहेंगे, जब तक संबंधित राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (SPCB) या दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) इस बात से संतुष्ट नहीं हो जाते कि फैक्ट्रियों ने जरूरी सुधारात्मक कदम उठा लिए हैं। गौरतलब है कि यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने गिरते एयर क्वालिटी लेवल को देखते हुए ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) के पहले चरण को लागू कर दिया है।

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