कनॉट प्लेस में दिवाली की रौनक गायब, विरोध प्रदर्शनों ने व्यापारियों को किया बेहाल

दिवाली का त्योहार करीब है, लेकिन दिल्ली के सबसे पॉश शॉपिंग हब कनॉट प्लेस में इस बार रौनक की जगह सन्नाटा पसरा है। लगातार हो रहे विरोध प्रदर्शनों और सुरक्षा के कड़े इंतजामों की वजह से ग्राहकों की संख्या में भारी गिरावट आई है, जिससे यहां के व्यापारियों, स्ट्रीट वेंडर्स और कैब ड्राइवरों के सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। हालात इतने खराब हैं कि कई दुकानदारों ने तो पूरे दिन एक भी बिक्री न होने की शिकायत की है, जिससे उनके लिए दुकान का किराया और अन्य खर्च निकालना भी मुश्किल हो गया है।
यह समस्या केवल कनॉट प्लेस तक सीमित नहीं है, बल्कि पालिका बाजार और जनपथ जैसे इलाकों में भी ग्राहक गायब हैं। जनपथ के स्थानीय रिटेलर सुनील गर्ग के मुताबिक, यहां ग्राहकों की भीड़ में करीब 60 फीसदी तक की कमी आई है। अक्टूबर की शुरुआत से ही अनिश्चितता के माहौल ने खरीदारों को बाजार आने से रोक दिया है।
₹2,000 करोड़ के नुकसान का दावा, पीएम से हस्तक्षेप की मांग
चेंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) के चेयरमैन बृजेश गोयल ने एक चौंकाने वाला आंकड़ा पेश किया है। उनके अनुसार, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और अन्य समूहों द्वारा किए जा रहे प्रदर्शनों के कारण कनॉट प्लेस, सदर बाजार और चांदनी चौक जैसे प्रमुख व्यापारिक केंद्रों को लगभग 2,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। CTI ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील की है कि शारदीय नवरात्रि से दिवाली तक के समय में विरोध प्रदर्शनों पर रोक लगाई जाए, क्योंकि यह समय दिल्ली के करीब 15 लाख व्यापारियों की साल भर की कमाई का सबसे महत्वपूर्ण समय होता है।
संकट तब और गहरा गया जब 9 अक्टूबर को न्यू दिल्ली ट्रेडर्स एसोसिएशन (NDTA) ने संभावित नागरिक अशांति के डर से 10 अक्टूबर को दुकानें बंद रखने की सलाह जारी की। NDTA के संयुक्त सचिव अमित गुप्ता ने बताया कि जंतर मंतर के पास स्थित व्यापारियों को भारी चोट पहुंची है। प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पों के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने की वजह से आम जनता बाजार आने से कतरा रही है।
इस बीच, दिल्ली ट्रैफिक पुलिस लगातार एडवाइजरी जारी कर रही है और मध्य दिल्ली के ट्रैफिक को डायवर्ट किया जा रहा है। सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए दिल्ली पुलिस ने कनॉट प्लेस इलाके में फ्लैग मार्च भी निकाला है, लेकिन व्यापारियों का मानना है कि जब तक शांति बहाल नहीं होगी, बाजार की रौनक वापस नहीं लौटेगी।