अमेरिकी नागरिक मैथ्यू वैनडाइक की रिहाई पर कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर बोला तीखा हमला

नई दिल्ली। कांग्रेस ने अमेरिकी नागरिक मैथ्यू एरॉन वैनडाइक की रिहाई को लेकर गुरुवार को केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के माध्यम से इस रिहाई की परिस्थितियों पर सवाल उठाए और केंद्र सरकार से जवाबदेही की मांग की। जयराम रमेश ने पूरी घटना का टाइमलाइन साझा करते हुए बताया कि वैनडाइक उन विदेशी नागरिकों के समूह में शामिल था, जिन्हें राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी एनआईए ने 13 मार्च को भारत के खिलाफ आतंकवादी गतिविधियों की साजिश रचने के आरोप में गिरफ्तार किया था। उन्होंने यह भी दावा किया कि एनआईए ने 16 मार्च को एक विशेष अदालत को बताया था कि आरोपी ने आतंकवादी गतिविधियों को बढ़ावा देने और भारत विरोधी विद्रोही समूहों का समर्थन करने का कथित तौर पर जुर्म कबूल कर लिया था। जयराम रमेश के अनुसार, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की 23 से 26 मई के बीच भारत यात्रा के दौरान भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने विदेश सचिव विक्रम मिस्री के सामने इस मुद्दे को उठाया था। रमेश ने यह भी बताया कि वैनडाइक के खिलाफ यूएपीए (UAPA) के आरोप 8 सितंबर को हटाए गए और उसे 24 सितंबर को हिरासत से रिहाई मिल गई। उन्होंने सवाल किया कि क्या भारत को इसके बदले में क्या मिला और इन संदिग्ध विदेशी नागरिकों को वीजा कैसे मिला।
पवन खेड़ा ने पीएम मोदी पर साधा निशाना
इस मामले पर कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने भी सरकार की आलोचना की और आरोप लगाया कि वैनडाइक बिना जरूरी परमिट के मिजोरम में घुसा था, म्यांमार गया था और वहां सशस्त्र समूहों को हथियारों का प्रशिक्षण दिया था। पवन खेड़ा ने कहा कि एक जाने-माने किराए के सैनिक यानी मर्सनेरी वैनडाइक को इस तरह से अमेरिका भेज दिया गया जैसे वह कोई राजकीय अतिथि हो। उन्होंने इसकी तुलना अमेरिका से हथकड़ी लगाकर निर्वासित किए गए भारतीय नागरिकों से की। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री अमेरिकी प्रशासन के दबाव में हैं और वह कॉम्प्रोमाइज्ड हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने तो भारतीय नागरिकों को हथकड़ी और सैन्य विमानों में डिपोर्ट किया था।
मामले की कानूनी और अदालती कार्यवाही
मामले के विवरण के अनुसार, वैनडाइक को एनआईए ने 13 मार्च को म्यांमार में एक प्रशिक्षण शिविर से जुड़ी कथित गतिविधियों के सिलसिले में गिरफ्तार किया था और शुरुआत में उसे गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम यानी यूएपीए की धारा 18 के तहत बुक किया गया था। जांच पूरी करने की वैधानिक अवधि 8 सितंबर को समाप्त हो गई थी, जिस दिन एनआईए ने आव्रजन और विदेशी अधिनियम की धाराओं 21 और 23 के तहत आरोपपत्र दाखिल किया और अदालत को सूचित किया कि यूएपीए अपराधों से जुड़ी आगे की जांच जारी है। इसके बाद वैनडाइक ने राउज एवेन्यू स्थित विशेष एनआईए अदालत में डिफॉल्ट जमानत के लिए आवेदन किया और तर्क दिया कि यूएपीए अपराधों की जांच निर्धारित अवधि के भीतर पूरी नहीं की गई है। विशेष एनआईए अदालत के न्यायाधीश प्रशांत शर्मा ने यूएपीए अपराधों की जांच पूरी न होने का हवाला देते हुए उसे जमानत दे दी। अदालत ने आरोपी को एक लाख रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि के जमानत बॉन्ड पर जमानत दे दी। सूत्रों के अनुसार, वैनडाइक ने इसके बाद आव्रजन और विदेशी अधिनियम, 2025 की धाराओं के तहत विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय यानी एफआरआरओ के समक्ष कंपाउंडिंग शुल्क के रूप में 5.5 लाख रुपये का भुगतान कर दिया है।