अंकिता भंडारी केस: इंसाफ की मांग को लेकर दिल्ली की सड़कों पर उतरी कांग्रेस सेवा दल, निकाला कैंडल मार्च

उत्तराखंड की बेटी अंकिता भंडारी हत्याकांड में न्याय की मांग एक बार फिर तेज हो गई है। इसी सिलसिले में 16 अक्टूबर 2026 को कांग्रेस सेवा दल ने देश की राजधानी दिल्ली में एक बड़ा कैंडल मार्च निकाला। यह मार्च रायसीना रोड स्थित इंडियन यूथ कांग्रेस कार्यालय से शुरू होकर जंतर मंतर roundabout तक पहुंचा, जहां प्रदर्शनकारियों ने इस मामले में पारदर्शी और समयबद्ध जांच की मांग की।
प्रदर्शन के दौरान सेवा दल के प्रमुख श्रीनिवास बी.वी. ने इस मामले में राजनीतिक हस्तक्षेप के गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने विशेष रूप से भाजपा नेता दुष्यंत गौतम से जुड़े आरोपों की तत्काल और गहन जांच करने की मांग की, ताकि सच्चाई सबके सामने आ सके।
CBI ऑफिस पहुंचे परिजन, नार्को टेस्ट की मांग
एक तरफ जहां सड़कों पर प्रदर्शन हो रहा था, वहीं दूसरी तरफ अंकिता के माता-पिता, वीरेंद्र सिंह भंडारी और सोनी देवी ने सीबीआई (CBI) मुख्यालय में वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात की। परिजनों ने सीबीआई डायरेक्टर को एक औपचारिक अनुरोध सौंपा है, जिसमें पूर्व भाजपा विधायक सुरेश राठौर और अभिनेत्री उर्मिला सनावर का नार्को टेस्ट कराने की मांग की गई है।
परिजनों का दावा है कि कुछ वायरल ऑडियो क्लिप्स में एक 'वीआईपी' के शामिल होने के संकेत मिलते हैं। सीबीआई ने इस कथित वीआईपी कनेक्शन की जांच के लिए एक अलग मामला दर्ज किया है और पीड़ित परिवार को निष्पक्ष जांच का भरोसा दिया है।
यह पूरा मामला अब राजनीतिक टकराव का केंद्र बन चुका है। इससे पहले 15 अक्टूबर को देहरादून में दुष्यंत गौतम की सिक्किम के राज्यपाल के रूप में नियुक्ति के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के बाद पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोडियाल समेत 30 कांग्रेस नेताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। वहीं 14 अक्टूबर को इंडिया गेट के पास प्रदर्शन के दौरान अंकिता के माता-पिता और कई कांग्रेस सांसदों को हिरासत में लिया गया था।
बता दें कि सितंबर 2022 में उत्तराखंड के एक रिजॉर्ट में 19 वर्षीय रिसेप्शनिस्ट अंकिता भंडारी की हत्या कर दी गई थी और उसका शव चिल्ला नहर से मिला था। मई 2025 में मुख्य आरोपियों—पुलकित आर्य, सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। हालांकि, पीड़ित परिवार का मानना है कि इस साजिश के पीछे बड़े चेहरे हैं जिन्हें अब तक बख्शा गया है। दूसरी ओर, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सरकार का कहना है कि उन्होंने एसआईटी के जरिए त्वरित कार्रवाई की है और परिवार को आर्थिक मदद व सरकारी नौकरी प्रदान की है।