मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर कांग्रेस और विपक्षी दलों का देशव्यापी प्रदर्शन

दिल्ली समेत देश के कई राज्यों में सोमवार को कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन जारी रखा। यह प्रदर्शन विशेष सघन पुनरीक्षण (SIR) और मतदाता सूची में नाम जोड़ने व हटाने की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए किया गया। राष्ट्रीय राजधानी में भारतीय यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया। इसके अलावा उत्तराखंड, असम, केरल, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश में भी कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किए। असम के गुवाहाटी में 'वोट चोरी' के आरोपों को लेकर प्रदर्शन किया गया, जबकि केरल के मलप्पुरम में जिला कलेक्ट्रेट तक मार्च निकाला गया। गुजरात के सूरत में कलेक्ट्रेट के बाहर प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया। राजस्थान के जयपुर में पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर वाटर कैनन का इस्तेमाल किया।
تلنگانہ (तेलंगाना) के हैदराबाद में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष महेश कुमार गौड़ और अन्य नेताओं ने इंदिरा गांधी की प्रतिमा से चुनाव आयोग कार्यालय तक मार्च निकाला। तेलंगाना के मंत्री मोहम्मद अजहरुद्दीन ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त देश के लिए नहीं बल्कि सरकार के लिए काम कर रहे हैं। तेलंगाना से कांग्रेस सांसद अनिल कुमार यादव ने कहा कि राहुल गांधी पहले ही कह चुके हैं कि चुनाव आयोग से समझौता किया गया है। श्रीनगर में विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने आरोप लगाया कि सीईसी ने देश को धोखा दिया है और चुनाव जनादेश चुराए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि एसआईआर पूरी तरह से अवैध है और ज्ञानेश कुमार को देश बचाने के लिए हटाया जाना चाहिए। पटना में वाम दलों ने भी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन किया। कांग्रेस, सीपीआई, सीपीएम, टीएमसी और शिवसेना (यूबीटी) सहित कई विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग की है।
इससे पहले Indian Express की रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीने की अवधि में एसआईआर प्रक्रिया और अन्य चुनावी मामलों से जुड़े फैसलों पर कम से कम 14 बार आपत्ति जताई थी। दर्ज असहमतियों में फॉर्म 6, मतदाताओं के नाम हटाने और मतदाता सूची डेटाबेस तक पहुंच से जुड़े मुद्दे शामिल थे। हालांकि, चुनाव आयोग ने इस बात से इनकार किया कि आपत्तियां अंतिम फैसलों पर संस्थागत असहमति थीं। आयोग ने कहा कि मसौदा चरण के दौरान उठाए गए परिचालन संबंधी सवाल, इनपुट और सुझाव उसकी मानक प्रशासनिक और निर्णय लेने की प्रक्रिया का हिस्सा थे। आयोग ने यह भी कहा कि एसआईआर से जुड़े सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे और उन पर तीनों आयुक्तों की मंजूरी थी।
इस बीच, केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने विपक्ष पर जनता को गुमराह करने और चुनाव आयोग को लेकर भ्रम पैदा करने की कोशिश करने का आरोप लगाया। नड्डा ने कहा कि अब चुनाव आयोग ने सारे झूठ बेनकाब कर दिए हैं। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी और आप के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल जनहित की परवाह किए बिना आरोप लगाते हैं और चले जाते हैं। नड्डा ने कहा कि एक झूठ को बार-बार दोहराने से वह सच नहीं बन जाता और राहुल गांधी को यह बात ध्यान से सुननी चाहिए।