चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन: हिरासत में लिए गए कॉकरोच जनता पार्टी के नेता रिहा

दिल्ली में चुनाव आयोग के वोटर लिस्ट रिवीजन के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे कॉकरोच जनता पार्टी के प्रमुख नेताओं को आखिरकार रिहा कर दिया गया है। 11 अक्टूबर 2026 को पुलिस ने पार्टी के मुख्य चेहरे अभिजीत डिपके, सौरव दास और आशुतोष रंका को रिहा किया, जिन्हें निवारक हिरासत (preventive detention) में रखा गया था। यह पूरा मामला तब शुरू हुआ जब इन नेताओं ने चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूचियों में किए गए बदलावों पर गंभीर सवाल उठाए थे।
अभिजीत डिपके के नेतृत्व में इस आंदोलन का दावा है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की देखरेख में हुए 'विशेष गहन संशोधन' (Special Intensive Revision) की प्रक्रिया में करोड़ों योग्य मतदाताओं के नाम लिस्ट से हटा दिए गए हैं। हालांकि, भारत निर्वाचन आयोग ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। आयोग का कहना है कि यह केवल एक नियमित प्रक्रिया थी, जिसके जरिए मृत, डुप्लिकेट और अपात्र प्रविष्टियों को हटाया गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, विभिन्न चरणों में करीब 13.3 करोड़ नामों को या तो फ्लैग किया गया या हटा दिया गया।
मेट्रो स्टेशन बंद और सुप्रीम कोर्ट की दखल
अक्टूबर की शुरुआत में इस विरोध प्रदर्शन ने उग्र रूप ले लिया था। 10 अक्टूबर को स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि दिल्ली पुलिस ने करीब 3,000 से 7,000 लोगों को हिरासत में ले लिया। सुरक्षा कारणों से 45 से 57 मेट्रो स्टेशनों तक पहुंच प्रतिबंधित कर दी गई और नई दिल्ली व हजरत निजामुद्दीन जाने वाली ट्रेनों को रद्द करना पड़ा। इस भारी अव्यवस्था के कारण सुप्रीम कोर्ट को रविवार को विशेष बैठक बुलानी पड़ी।
कोर्ट ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए थे कि मेट्रो या ट्रेन सेवाओं पर पूरी तरह प्रतिबंध न लगाया जाए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि "मक्खी मारने के लिए हथौड़े का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।" इसके बावजूद स्टेशनों के बंद रहने पर वकील शैलेंद्र मणि त्रिपाठी ने अवमानना याचिका दायर की, जबकि वरिष्ठ वकील मेनका गुरुस्वामी ने हिरासत में लिए गए नेताओं के लिए बंदी प्रत्यक्षीकरण (habeas corpus) याचिका लगाई।
इस पूरे घटनाक्रम में एक नाटकीय मोड़ तब आया जब ANI के वीडियो में दिखा कि पुलिस अधिकारियों ने इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर एक विमान के अंदर घुसकर पार्टी नेतृत्व को हिरासत में लिया। अभिजीत डिपके को विमान से हटाते समय वह नारेबाजी करते नजर आए।
दिलचस्प बात यह है कि इस आंदोलन की शुरुआत मई 2026 में जस्टिस सूर्या कांत की एक टिप्पणी पर व्यंग्यात्मक प्रतिक्रिया के रूप में हुई थी, लेकिन अब यह बेरोजगारी और संस्थागत पारदर्शिता जैसे बड़े मुद्दों से जुड़ गया है। ममता बनर्जी, अरविंद केजरीवाल और पिनरई विजयन जैसे दिग्गज विपक्षी नेताओं ने भी चुनाव आयोग के कामकाज पर चिंता जताई है। फिलहाल, कॉकरोच जनता पार्टी ने साफ कर दिया है कि वे अपनी गतिविधियां जारी रखेंगे और जहां भी उन्हें रोका जाएगा, उसे ही अपना विरोध स्थल बनाएंगे।