वोटर लिस्ट विवाद: दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत डिपके हिरासत में

नई दिल्ली में वोटर लिस्ट के रिवीजन को लेकर छिड़े विवाद ने अब तूल पकड़ लिया है। शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026 को दिल्ली पुलिस ने युवाओं के बीच लोकप्रिय 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के संस्थापक अभिजीत डिपके को उनके आवास से हिरासत में ले लिया। यह कार्रवाई तब की गई जब डिपके कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में आयोजित 'लेहरा दो तिरंगा' रैली में शामिल होने की तैयारी कर रहे थे। पुलिस ने उनके साथ छात्र कार्यकर्ता नेहा बोरा को भी हिरासत में लिया, जो विरोध प्रदर्शन स्थल की ओर बढ़ रही थीं।
वरिष्ठ पुलिस अधिकारी सचिन शर्मा ने इस कार्रवाई की पुष्टि करते हुए बताया कि यह एक निवारक हिरासत (preventive custody) है। पुलिस का कहना है कि इस सभा के लिए कोई आधिकारिक अनुमति नहीं ली गई थी और सार्वजनिक सभाओं पर हाल ही में नए प्रतिबंध लगाए गए हैं।
वोटर लिस्ट से 13 करोड़ नाम हटने का आरोप
यह पूरा विरोध प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर किया जा रहा था। कॉकरोच जनता पार्टी और अन्य प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि जून 2025 से शुरू हुए 'स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन' (SIR) के जरिए वोटर लिस्ट से करीब 13 करोड़ नाम हटा दिए गए हैं। पार्टी का दावा है कि इस प्रक्रिया से हाशिए पर रहने वाले समुदायों को निशाना बनाया गया है, जिसका सीधा फायदा सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को मिल रहा है।
हालांकि, भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। आयोग का कहना है कि यह पूरी प्रक्रिया कानूनी है और यदि किसी मतदाता का नाम गलती से कट गया है, तो वे दोबारा पंजीकरण के लिए आवेदन कर सकते हैं। इस मामले में पूर्व चुनाव आयुक्त अशोक लवासा ने भी कहा कि इस स्तर का रिवीजन अभूतपूर्व है और यह चुनावी समावेशिता के सिद्धांतों के विपरीत है, हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही चुनाव आयोग के इस अधिकार को बरकरार रखा था।
इस आंदोलन की आग तब और भड़क गई जब पार्टी के अन्य नेताओं, सौरव दास और आशुतोष रंका को जंतर मंतर पर विरोध करने के कारण पांच दिन की जेल की सजा सुनाई गई। गौरतलब है कि पुलिस ने हाल ही में जंतर मंतर को प्रदर्शन स्थल की सूची से हटा दिया है। इन गिरफ्तारियों के बावजूद, करीब 2,000 प्रदर्शनकारी कनॉट प्लेस पहुंचने में कामयाब रहे और वहां तिरंगा फहराया। दूसरी ओर, भाजपा ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि विपक्षी दल और छात्र समूह लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं।