कॉकरोच जनता पार्टी ने दिल्ली पुलिस पर लगाया अवैध हिरासत और डिवाइस टेंपरिंग का आरोप

दिल्ली में राजनीतिक हलचल तब तेज हो गई जब कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने दिल्ली पुलिस पर बेहद गंभीर आरोप लगाए। सौरव दास और उनके साथ सह-संयोजक आशुतोष रंका और अभिजीत दीपके का दावा है कि उन्हें न केवल अवैध रूप से हिरासत में लिया गया, बल्कि पुलिस ने उनके मोबाइल फोन के साथ छेड़छाड़ भी की है। यह पूरा मामला तब शुरू हुआ जब ये नेता मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने के लिए दिल्ली पहुंचे थे।
घटनाक्रम के अनुसार, 10 अक्टूबर 2026 को जैसे ही ये नेता दिल्ली एयरपोर्ट पर विमान से उतरे, पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। सौरव दास ने इस कार्रवाई को 'अपहरण' करार देते हुए कहा कि पुलिस अधिकारी बिना किसी औपचारिक नोटिस या कारण बताए उनके विमान में ही चढ़ गए और उन्हें कानूनी सलाह लेने से भी रोका गया। रविवार को उन्हें एक कार्यकारी मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किया गया, जहां 50,000 रुपये के व्यक्तिगत बॉन्ड और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने की शर्त पर उन्हें रिहा किया गया।
मोबाइल डेटा चोरी और इमरजेंसी जैसी स्थिति का दावा
सौरव दास ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनके फोन 24 घंटे से ज्यादा समय तक पुलिस के पास रहे, लेकिन उन्हें कोई अनिवार्य जब्ती मेमो (seizure memo) नहीं दिया गया। उन्हें डर है कि इस दौरान उनके डिवाइस को हैक या क्लोन किया गया होगा, ताकि भविष्य में उनके खिलाफ फर्जी सबूत गढ़े जा सकें। दास ने इस स्थिति की तुलना 1975 के आपातकाल (Emergency) से करते हुए आरोप लगाया कि प्रशासन नागरिक स्वतंत्रता को कुचल रहा है और ज्ञानेश कुमार को बचाने के लिए इंटरनेट सेवाओं और यात्रा पर पाबंदी लगाई जा रही है।
इतना ही नहीं, दास ने डेटा ब्रीच का आरोप लगाते हुए कहा कि दिल्ली पुलिस ने उनका फोन नंबर लीक कर दिया। उन्होंने दावा किया कि उनके विरोध प्रदर्शन की अनुमति खारिज करने वाले पत्र और आंतरिक दस्तावेज सार्वजनिक होने के बाद, उन्हें एक ही घंटे में 300 से अधिक कॉल और अनगिनत व्हाट्सएप संदेश मिले।
दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस ने इन सभी आरोपों को खारिज कर दिया है। पुलिस का कहना है कि यह कार्रवाई भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 126 और 170 के तहत 'निवारक हिरासत' (preventive detention) के रूप में की गई थी और सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया गया। इस बीच, सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया है कि मेट्रो और रेलवे सेवाओं को सुचारू रखा जाए और शांतिपूर्ण नागरिकों के साथ कानून के अनुसार व्यवहार किया जाए। वहीं, संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय ने भी इन गिरफ्तारियों पर चिंता जताई है, जिसे भारत सरकार ने आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप बताकर खारिज कर दिया है।