दिल्ली में CJP के प्रदर्शन के दौरान बवाल, कई पुलिसकर्मी घायल, 7 हजार हिरासत में

राजधानी दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा आयोजित एक विरोध प्रदर्शन के दौरान हालात तब बिगड़ गए जब प्रदर्शनकारियों और दिल्ली पुलिस के बीच हिंसक झड़प हो गई। इस टकराव में कई पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। घटना की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि प्रदर्शनकारियों ने पुलिस टीम पर पथराव किया और महिला अधिकारियों के साथ बदसलूकी की।
डीसीपी सृष्टि पांडे ने बताया कि प्रदर्शन के दौरान महिला पुलिस अधिकारियों को न केवल अपशब्द कहे गए, बल्कि उनके साथ शारीरिक धक्का-मुक्की भी की गई। इस हिंसा में एक महिला हेड कांस्टेबल की उंगली में फ्रैक्चर हुआ है, जबकि हेड कांस्टेबल नागेंद्र की नेमप्लेट झड़प के दौरान फाड़ दी गई। इंस्पेक्टर विवेक कुमार के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों ने पुलिस की एक छोटी टुकड़ी को निशाना बनाकर उन पर पत्थर बरसाए।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम और भारी संख्या में गिरफ्तारियां
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार कर दिया। पुलिस का कहना था कि आवेदन बहुत देर से दिया गया और पिछले नियमों के उल्लंघन को देखते हुए सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए अनुमति नहीं दी जा सकती थी। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पूरे न्यू दिल्ली में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू कर दी गई थी, ताकि भीड़ जमा न हो सके। पुलिस ने इस ऑपरेशन में 20,000 से अधिक पुलिस और CAPF जवानों को तैनात किया था।
संयुक्त पुलिस आयुक्त नूपुर प्रसाद ने पुष्टि की कि इस दौरान लगभग 7,000 CJP समर्थकों को हिरासत में लिया गया, जिनमें से 400 से अधिक केवल मध्य दिल्ली से ही पकड़े गए। भीड़ को रोकने के लिए मेट्रो स्टेशनों को बंद किया गया और कई ट्रेनों को रद्द करना पड़ा।
CJP के संस्थापक अभिजीतdeepcopy और अन्य सह-संयोजकों को एयरपोर्ट पर ही रोक लिया गया। पार्टी का आरोप है कि उनके नेताओं और पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, ममता बनर्जी, पिनाराई विजयन और माणिक सरकार जैसे दिग्गजों की हिरासत को "अपहरण" और "इमरजेंसी" जैसा बताया जा रहा है। प्रदर्शनकारी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे थे और जंतर मंतर तक मार्च करना चाहते थे।
इस हिंसा और तनाव के बाद CJP ने 11 अक्टूबर को फिर से प्रदर्शन करने की चेतावनी दी है। वहीं, मेट्रो स्टेशनों को बंद करने के मामले में सुप्रीम कोर्ट भी इस मुद्दे पर सुनवाई करने वाला है।