कॉकरोच जनता पार्टी का 'लेहरा दो तिरंगा' मार्च प्रतिबंधित, दिल्ली पुलिस ने 21 सड़कों के लिए जारी की ट्रैफिक एडवाइजरी

दिल्ली के कनॉट प्लेस में आज होने वाला कॉकरोच जनता पार्टी मार्च विवादों और पुलिस की सख्ती के बीच फंस गया है। पार्टी के संस्थापक अभिजीत डिपके द्वारा आयोजित 'लेहरा दो तिरंगा' मार्च को दिल्ली पुलिस ने आधिकारिक तौर पर अनुमति देने से इनकार कर दिया है। सुरक्षा कारणों और भीड़ को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन ने कड़े कदम उठाए हैं, जिसके चलते शहर के कई हिस्सों में ट्रैफिक व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका है।
जानकारी के मुताबिक, यह मार्च आज शाम 5 बजे सेंट्रल पार्क में आयोजित होना था, लेकिन न्यू दिल्ली नगर परिषद (NDMC) ने 17 अक्टूबर तक पार्क को बंद रखने का आदेश दिया है। स्थिति को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू कर दी है, ताकि इलाके में किसी भी तरह की बड़ी भीड़ जमा न हो सके। खबर है कि पुलिस ने औपचारिक नोटिस देने के बाद पार्टी के संस्थापक अभिजीत डिपके को निवारक हिरासत (preventive detention) में ले लिया है।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम और ट्रैफिक अलर्ट
इस पूरे मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए मध्य दिल्ली में सुरक्षा का घेरा बेहद सख्त कर दिया गया है। करीब 6,000 दिल्ली पुलिस के जवानों के साथ केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) की 220 कंपनियां तैनात की गई हैं। हालांकि, पुलिस ने एक बीच का रास्ता निकालते हुए 11 लोगों के एक छोटे समूह को किसी वैकल्पिक स्थान पर तिरंगा लहराने की अनुमति देने की पेशकश की है।
वहीं, दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने दोपहर 3 बजे से एक एडवाइजरी जारी की है, जिसमें 21 सड़कों पर यातायात प्रभावित होने की चेतावनी दी गई है। इनमें मुख्य रूप से निम्नलिखित रास्ते शामिल हैं:
- संसद मार्ग
- जनपथ
- बाराखंबा रोड
- मिंटो रोड
- मंडी हाउस के आसपास का इलाका
ट्रैफिक पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि वे अपनी यात्रा की योजना पहले से बना लें, अतिरिक्त समय लेकर चलें और भीड़भाड़ से बचने के लिए सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करें।
गौरतलब है कि 16 मई 2026 को बनी 'कॉकरोच जनता पार्टी' खुद को 'आलसियों और बेरोजगारों की आवाज' बताती है और राजनीतिक व्यंग्य के जरिए विधायी सुधारों की वकालत करती है। इस मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने हालांकि विरोध प्रदर्शन को रोकने से इनकार किया था, लेकिन यह स्पष्ट किया कि सभी पक्षों को समझदारी से काम लेना चाहिए। पुलिस ने 'अमित सैनी बनाम पुलिस कमिश्नर' मामले का हवाला देते हुए कहा कि सार्वजनिक असुविधा को रोकना उनकी प्राथमिकता है।