उत्तराखंड के विकास के लिए सीएम धामी ने दिल्ली में प्रबुद्धजनों से मांगे सुझाव

Kittu Kumari27 September 20262 min read1 viewDelhi Local
उत्तराखंड के विकास के लिए सीएम धामी ने दिल्ली में प्रबुद्धजनों से मांगे सुझाव

दिल्ली स्थित उत्तराखंड निवास में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रबुद्धजनों और उत्तराखंड के प्रवासियों से बातचीत की। मुख्यमंत्री ने राज्य के विकास में प्रवासियों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया और राज्य की प्रगति में तेजी लाने के लिए सुझाव मांगे। इस कार्यक्रम के दौरान कई सुझाव सामने आए, जिन्हें नीतियों में शामिल किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने विकास को गति देने के लिए बजट बढ़ाकर 1.12 लाख करोड़ रुपये कर दिया है। रिवर्स पलायन को बढ़ावा देने के प्रयासों के तहत पर्यटन, स्वरोजगार और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों का विस्तार किया गया है, जिससे राज्य में रिवर्स पलायन में 44 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। कनेक्टिविटी के मोर्चे पर, दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर ने यात्रा के समय को कम किया है और देहरादून से 50 से अधिक विमान सेवाएं उपलब्ध हैं।

पारदर्शी भर्ती और रोजगार के प्रयास

राज्य सरकार ने भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जुलाई 2021 से अब तक 35,000 से अधिक युवाओं को सरकारी सेवाओं में नियुक्त किया गया है। नकल माफिया के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए 100 से अधिक लोगों को जेल भेजा गया है और नकल विरोधी कानून लागू किया गया है ताकि मेहनती युवाओं का भविष्य सुरक्षित रहे। युवा और महिलाएं होमस्टे, छोटे होटल, कृषि और स्थानीय उद्यमों के माध्यम से स्वरोजगार की ओर बढ़ रहे हैं।

पर्यटन और आधारभूत संरचना का विकास

उत्तराखंड में चार धाम यात्रा, कंवर यात्रा और आदि कैलाश यात्रा में पर्यटकों और तीर्थयात्रियों की संख्या में भारी वृद्धि हुई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे के बाद आदि कैलाश क्षेत्र में पर्यटकों की संख्या काफी बढ़ी है, जिससे सीमावर्ती क्षेत्रों में स्थानीय रोजगार को बढ़ावा मिला है। इसके अलावा, राज्य ने नीति आयोग के सतत विकास लक्ष्यों की रैंकिंग में शीर्ष स्थान प्राप्त किया है।

सुशासन और शिक्षा में सुधार

उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू कर सुशासन और समान अधिकारों का एक नया मॉडल पेश किया गया है। इसके साथ ही डेमोग्राफी की रक्षा के लिए धर्म परिवर्तन और दंगों के खिलाफ कड़े कानून लागू किए गए हैं। शिक्षा क्षेत्र में सुधार के तहत मदरसा बोर्ड को समाप्त कर उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान प्राधिकरण की स्थापना की गई है और निर्धारित मानदंडों के अनुसार न चलने वाले 250 से अधिक मदरसों पर कार्रवाई की गई है। सीमावर्ती क्षेत्रों में सड़क, रेल, रोपवे और हवाई कनेक्टिविटी का तेजी से विस्तार किया जा रहा है।

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