जंतर मंतर प्रदर्शन की अनुमति के लिए CJP पहुंचे पुलिस स्टेशन, दिल्ली में सुरक्षा सख्त

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में एक बार फिर तनावपूर्ण माहौल देखा जा रहा है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं ने सोमवार, 12 अक्टूबर 2026 को सुबह 10 बजे पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन का रुख किया। उनका मकसद जंतर मंतर पर विरोध प्रदर्शन के लिए नई तारीख और औपचारिक अनुमति मांगना था। इस प्रतिनिधिमंडल में सह-संयोजक आशुतोष रंका, सौरव दास और कानूनी प्रमुख रत्ना सिंह शामिल थे।
बता दें कि इससे पहले 10 अक्टूबर को होने वाले प्रदर्शन की अनुमति दिल्ली पुलिस की जॉइंट कमिश्नर नूपुर प्रसाद ने यह कहते हुए खारिज कर दी थी कि नोटिस कम समय में दिया गया और पिछले प्रदर्शनों के नियमों का पालन नहीं किया गया। इस बीच, दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। लुटियंस दिल्ली में 30,000 से अधिक सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं और अनधिकृत भीड़ को रोकने के लिए जगह-जगह बैरिकेडिंग की गई है।
मेट्रो स्टेशन बंद और धारा 163 लागू
सुरक्षा कारणों से दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) ने 12 अक्टूबर को सुबह 6 बजे से शाम 4 बजे तक छह स्टेशनों को बंद रखा, जिससे आम जनता को काफी परेशानी हुई। साथ ही, शहर में ट्रैफिक डायवर्जन भी लागू किया गया। चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मतदाता सूची में गड़बड़ी के आरोपों को लेकर हो रहे विरोध प्रदर्शनों के मद्देनजर, 2 अक्टूबर से ही पूरे नए दिल्ली जिले में धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू है।
इस पूरे विवाद में CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके की भूमिका अहम रही है। उन्हें 10 अक्टूबर को दिल्ली एयरपोर्ट पर हिरासत में लिया गया था, जिसके बाद 11 अक्टूबर को मजिस्ट्रेट ने उन्हें रिहा किया। रिहाई के समय उन्हें एक साल तक शांति भंग न करने की हिदायत दी गई थी, लेकिन दिपके ने स्पष्ट किया है कि उन्होंने भविष्य में प्रदर्शन न करने का कोई बॉन्ड साइन नहीं किया है और वे अपना आंदोलन जारी रखेंगे।
हिरासत के दौरान कार्यकर्ताओं ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि उन्हें जबरन विमान से उतारा गया, वकील से मिलने नहीं दिया गया और उनके फोन जब्त कर लिए गए। आशुतोष रंका ने पुलिस को 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया था कि यदि प्रदर्शन की तारीख नहीं मिली, तो पार्टी खुद विरोध का आह्वान करेगी। CJP अब सुप्रीम कोर्ट के 11 अक्टूबर के उस फैसले का हवाला दे रही है, जिसमें कहा गया है कि शांतिपूर्ण और निहत्थे प्रदर्शन का अधिकार केवल अनुच्छेद 19(2) के तहत उचित प्रतिबंधों के अधीन है।