CJP प्रदर्शन के दौरान दिल्ली में भारी तनाव: हजारों हिरासत में, बंगला साहिब गुरुद्वारे में ली शरण

राजधानी दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा आयोजित विरोध प्रदर्शन के दौरान हालात बेहद तनावपूर्ण हो गए। जंतर मंतर की ओर कूच कर रहे प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया, जिसके चलते हजारों लोगों को हिरासत में लिया गया। इस अफरा-तफरी के बीच सैकड़ों प्रदर्शनकारियों ने गुरुद्वारा बंगला साहिब में शरण ली, जिससे यह स्थान अचानक भीड़ का केंद्र बन गया।
सुरक्षा व्यवस्था को पुख्ता करने के लिए दिल्ली पुलिस और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के करीब 40,000 जवानों को तैनात किया गया था। प्रशासन ने 9 अक्टूबर से ही कड़े प्रतिबंध लागू कर दिए थे, जिसमें मध्य दिल्ली में 24 घंटे के लिए मोबाइल इंटरनेट बंद करना और 11 अक्टूबर तक बसों और दिल्ली मेट्रो की सेवाओं को निलंबित करना शामिल था। पुलिस के मुताबिक, दिल्ली में 6,000 से अधिक और मुंबई में करीब 400 लोगों को हिरासत में लिया गया है।
दिग्गज चेहरे हिरासत में और विवादों में पुलिस
इस कार्रवाई में कई हाई-प्रोफाइल हस्तियां भी शामिल रहीं। CJP के संस्थापक अभिजीत डिपके, प्रवक्ता सौरव दास और आशुतोष रंका को हिरासत में लिया गया, जिनमें से अंतिम दो को दिल्ली एयरपोर्ट पर ही पकड़ लिया गया। इसके अलावा, यूट्यूबर ध्रुव राठी, वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण, एक्टिविस्ट योगेंद्र यादव, AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा और अर्थशास्त्री जीन ड्रेज़ जैसे प्रमुख चेहरों को भी सुरक्षा घेरे में पकड़ा गया।
इस बीच, गुरुद्वारा बंगला साहिब को लेकर एक विवाद खड़ा हो गया। सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो वायरल हुए जिनमें दावा किया गया कि पुलिस अधिकारियों ने गुरुद्वारे के अंदर जूते पहने हुए थे। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि अधिकारी उस सामान्य रास्ते पर थे जहां जूते उतारने की जरूरत नहीं होती। पुलिस ने इन वीडियो को "दुर्भावनापूर्ण" बताते हुए साझा करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।
DSGMC अध्यक्ष हरमीत सिंह कालका ने स्पष्ट किया कि गुरुद्वारा शरण देने का स्थान है, लेकिन इसका उपयोग राजनीतिक गतिविधियों के लिए नहीं किया जाएगा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस ने विरोध के बावजूद प्रदर्शनकारियों को पकड़ने के लिए परिसर में प्रवेश किया।
इस पूरी कार्रवाई पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी प्रतिक्रिया आई है। एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडिया के बोर्ड अध्यक्ष आकार पटेल ने इन प्रतिबंधों को "अत्यधिक और असंगत" बताया, जबकि संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय ने मनमाने ढंग से हिरासत में लिए गए लोगों को रिहा करने और शांतिपूर्ण सभा के अधिकार का सम्मान करने का आग्रह किया है।
मामला अब कानूनी मोड़ ले चुका है, जहां राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी ने ट्रांजिट शटडाउन और सामूहिक हिरासत को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है, जिस पर 11 अक्टूबर को सुनवाई होनी है। दूसरी ओर, CJP ने ऐलान किया है कि वे 11 अक्टूबर को फिर से जंतर मंतर पर अपना प्रदर्शन जारी रखेंगे।