आकाशवाणी भवन के पास CJP के प्रदर्शन में बवाल, पथराव में दो पुलिसकर्मी घायल

दिल्ली के आकाशवाणी भवन के पास उस समय अफरा-तफरी मच गई जब कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा आयोजित एक विरोध प्रदर्शन हिंसक हो गया। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर जुटे प्रदर्शनकारियों ने पथराव शुरू कर दिया, जिसमें दो पुलिस अधिकारी घायल हो गए। इस हंगामे के दौरान प्रदर्शनकारियों ने पुलिस बैरिकेड्स को उखाड़ फेंका, जिससे इलाके में तनाव फैल गया।
घायलों में सब-इंस्पेक्टर बजरंग जाधव भी शामिल हैं। उन्होंने बताया कि जब वह उपद्रवियों को पकड़ने की कोशिश कर रहे थे, तब उन पर हमला हुआ। यह पूरा विवाद मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे और मतदाता सूचियों के विशेष गहन संशोधन (SIR) को वापस लेने की मांग को लेकर शुरू हुआ था।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम और बड़े पैमाने पर हिरासत
इस विरोध प्रदर्शन को रोकने के लिए दिल्ली पुलिस ने बेहद सख्त कदम उठाए थे। जॉइंट सीपी नुपुर प्रसाद के मुताबिक, CJP ने प्रदर्शन की अनुमति के लिए आवेदन तो किया था, लेकिन वह निर्धारित 10 दिन की नोटिस अवधि को पूरा नहीं करता था, इसलिए जंतर मंतर पर प्रदर्शन की इजाजत नहीं दी गई। सुरक्षा के लिए शहर में 25,000 से 35,000 पुलिसकर्मी तैनात किए गए थे।
हालात को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन ने कई कड़े फैसले लिए:
- 9 अक्टूबर की शाम से दिल्ली मेट्रो के 45 स्टेशनों को बंद कर दिया गया।
- जनपथ-कर्तव्य पथ क्रॉसिंग के 4 किलोमीटर के दायरे में 24 घंटे के लिए मोबाइल इंटरनेट सेवाएं निलंबित रहीं।
- शहर भर से 1,500 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया, जिनमें जंतर मंतर पहुंचने की कोशिश कर रहे 500 से ज्यादा प्रदर्शनकारी शामिल थे।
पुलिस की इस कार्रवाई में CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके, सह-संयोजक सौरव दास और आशुतोष रंका को एयरपोर्ट पहुंचते ही हिरासत में ले लिया गया। इसके अलावा, मशहूर यूट्यूबर ध्रुव राठी को भी उनके गुरुग्राम स्थित आवास से हिरासत में लिया गया। मुख्य नेतृत्व की अनुपस्थिति में अजिंक्य शिंदे ने प्रदर्शन की कमान संभाली, जबकि AISA अध्यक्ष नेहा बोरा ने विरोध प्रदर्शन को दिल्ली हाट की ओर मोड़ दिया।
CJP ने पुलिस की इस कार्रवाई की कड़ी निंदा करते हुए इसे लोकतंत्र की आवाज दबाने की एक सोची-समझी साजिश बताया है। पार्टी का कहना है कि जब राज्य विरोधियों को दबाने के लिए सामूहिक गिरफ्तारियां करता है, तो लोकतंत्र की रक्षा के लिए जनता को आगे आना चाहिए। गौरतलब है कि यह पूरा घटनाक्रम 9 अक्टूबर को INDIA गठबंधन और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के बीच हुई बैठक के बाद हुआ, जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग वाला एक ज्ञापन सौंपा गया था।