जंतर मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति के लिए CJP ने दिल्ली पुलिस को लिखा पत्र, दिया 24 घंटे का अल्टीमेटम

राजधानी दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों के लिए मशहूर जंतर मंतर अब चर्चा में है, लेकिन इस बार वजह अलग है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने जंतर मंतर पर एक शांतिपूर्ण प्रदर्शन आयोजित करने के लिए दिल्ली पुलिस को औपचारिक पत्र सौंपा है। इस पत्र के जरिए संगठन ने पुलिस प्रशासन से प्रदर्शन के लिए एक निश्चित तारीख तय करने की मांग की है और जवाब के लिए 24 घंटे की समय सीमा तय की है।
यह मामला तब सामने आया जब जंतर मंतर को विरोध प्रदर्शनों के लिए निर्धारित स्थल (नोटिफाइड वेन्यू) की सूची से हटा दिया गया। दिल्ली पुलिस ने अब इसके बदले तीन नए स्थानों—रामलीला मैदान, बुराड़ी ग्राउंड और पूर्वी दिल्ली के सीबीडी ग्राउंड को प्रदर्शनों के लिए निर्धारित किया है। इसी बीच, CJP कार्यकर्ताओं सौरव दास और आशुतोष रंका ने पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन के डीसीपी को पत्र लिखकर जंतर मंतर पर ही शांतिपूर्ण सभा की अनुमति मांगी है।
पुलिस की सख्ती और लोकतांत्रिक अधिकारों का मुद्दा
CJP ने अपने पत्र में दिल्ली में पुलिस की भारी तैनाती और सख्ती पर गंभीर सवाल उठाए हैं। पत्र में आरोप लगाया गया है कि शहर में 55,000 से अधिक पुलिस और अर्धसैनिक बलों की मौजूदगी के कारण आम नागरिक और प्रेस के सदस्य परेशानी झेल रहे हैं। संगठन का दावा है कि मनमाने ढंग से हिरासत में लेने और हिंसा जैसी घटनाओं से आम जनजीवन प्रभावित हुआ है, साथ ही सड़क बंद होने और बैरिकेड्स की वजह से व्यापारियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है।
संगठन ने पुलिस की उस दलील को भी चुनौती दी है जिसमें अक्सर कहा जाता है कि प्रदर्शन की सूचना 10 दिन पहले नहीं दी गई। CJP ने पुलिस को विकल्प दिया है कि वे अपनी सुविधा के अनुसार किसी भी तारीख को जंतर मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति दे सकते हैं। पत्र में स्पष्ट किया गया है कि शांतिपूर्ण ढंग से इकट्ठा होने का अधिकार संवैधानिक है और इसे रोका नहीं जा सकता।
पत्र में चेतावनी दी गई है कि यदि 24 घंटे के भीतर जवाब नहीं मिला, तो प्रदर्शनकारी शांतिपूर्ण तरीके से अपना विरोध जारी रखेंगे और बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन के लिए एक नई तारीख की घोषणा की जाएगी।
मीडिया से बात करते हुए कार्यकर्ता आशुतोष रंका ने एक अजीबोगरीब अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि जब वे पत्र देने पहुंचे, तो उन्हें ऐसा लगा जैसे उनके आने पर पूरा पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन खाली हो गया हो। उन्होंने कहा कि डीसीपी गलती से कमरे में आए लेकिन उन्हें देखते ही बाहर चले गए, और एडिशनल डीसीपी व एसएचओ भी वहां मौजूद नहीं थे। हालांकि, उन्होंने पुष्टि की कि उनका पत्र पुलिस प्रशासन तक पहुंच गया है।