जंतर मंतर पर प्रदर्शन: CJP नेता आशुतोष रंका और सौरव दास 5 दिन की न्यायिक हिरासत में, भेजे गए तिहाड़ जेल

Kittu Kumari14 October 20262 min read0 viewsDelhi Local
जंतर मंतर पर प्रदर्शन: CJP नेता आशुतोष रंका और सौरव दास 5 दिन की न्यायिक हिरासत में, भेजे गए तिहाड़ जेल

दिल्ली पुलिस ने जंतर मंतर इलाके में अनधिकृत प्रवेश और प्रदर्शन करने के आरोप में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के दो प्रमुख चेहरों को गिरफ्तार किया है। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रंका और मुख्य प्रवक्ता सौरव दास को बुधवार, 14 अक्टूबर 2026 को कोर्ट ने पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया, जिसके बाद उन्हें तिहाड़ जेल में बंद कर दिया गया।

यह पूरा मामला मंगलवार, 13 अक्टूबर को शुरू हुआ जब पुलिस ने रंका, दास और उनके साथी अजिंक्य शिंदे को हिरासत में लिया था। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद 12 अक्टूबर 2026 को जंतर मंतर को विरोध प्रदर्शन स्थल के रूप में डी-नोटिफाई कर दिया गया था। इसके बावजूद इन नेताओं ने वहां पहुंचकर प्रदर्शन किया, जिसे पुलिस ने कानून का उल्लंघन माना।

कानूनी शर्तों का उल्लंघन और पुलिस की कार्रवाई

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कोर्ट में पेशी के दौरान दिल्ली पुलिस ने बताया कि आशुतोष रंका और सौरव दास ने पहले से मौजूद एक कानूनी बॉन्ड की शर्तों को तोड़ा है। इस बॉन्ड के तहत उन्हें एक साल तक किसी भी विरोध प्रदर्शन में शामिल होने से प्रतिबंधित किया गया था। पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने न केवल इस शर्त को तोड़ा, बल्कि सार्वजनिक शांति भंग की और उनके खिलाफ दो अन्य आपराधिक मामले भी दर्ज हैं। मजिस्ट्रेट के सामने पुलिस ने इन गिरफ्तारियों को 'निवारक उपाय' (Preventive measures) बताया और उन पर सरकारी काम में बाधा डालने व प्रतिबंधित आदेशों के उल्लंघन के आरोप लगाए।

दूसरी ओर, अभिजीत डिपके के नेतृत्व वाली CJP का दावा है कि वे केवल मतदाता सूचियों के विशेष गहन संशोधन (SIR) में अनियमितताओं के खिलाफ आवाज उठा रहे थे और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे थे। पार्टी का कहना है कि वे शांतिपूर्वक तिरंगा फहरा रहे थे और देशभक्ति के नारे लगा रहे थे। हालांकि, पुलिस का कहना है कि सुरक्षा बैरिकेड्स को तोड़कर अंदर घुसा गया था।

पार्टी की कानूनी मामलों की प्रमुख रत्ना सिंह ने बताया कि अजिंक्य शिंदे की जमानत की प्रक्रिया पूरी की जा रही है। वहीं, पार्टी संस्थापक अभिजीत डिपके ने इस कार्रवाई की कड़ी निंदा करते हुए इसे लोकतांत्रिक विरोध को दबाने की कोशिश करार दिया है।

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