CJP नेताओं की रिहाई: दिल्ली मजिस्ट्रेट ने दी छूट, लेकिन एक साल तक शांति बनाए रखने की शर्त लगाई

दिल्ली पुलिस की हिरासत में लिए गए CJP के तीन प्रमुख नेताओं को एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट कोर्ट ने रिहा करने का आदेश दिया है। यह कार्रवाई तब हुई जब इन नेताओं को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ होने वाले एक विरोध प्रदर्शन से पहले प्रिवेंटिव डिटेंशन (निवारक हिरासत) में लिया गया था। हालांकि, रिहाई के साथ कोर्ट ने एक सख्त शर्त भी जोड़ी है।
रिहा किए गए नेताओं में अभिजीत दिपके, सौरव दास और आशुतोष रंका शामिल हैं। उनके वकील और CJP की कानूनी मामलों की प्रमुख रत्ना सिंह ने जानकारी दी कि कोर्ट ने उन्हें रिहा तो कर दिया है, लेकिन अगले एक साल तक ऐसी किसी भी गतिविधि में शामिल होने से मना किया है, जिससे शांति और व्यवस्था भंग हो सकती हो।
हवाई अड्डे से ही पुलिस ने दबोचा था
मामला तब शुरू हुआ जब ये तीनों नेता विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के लिए दिल्ली पहुंचे थे। जैसे ही उनकी फ्लाइट राष्ट्रीय राजधानी में लैंड हुई, दिल्ली पुलिस ने उन्हें तुरंत हिरासत में ले लिया। इसके बाद उन्हें दक्षिण-पश्चिम जिले के स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया, जो उस समय दिल्ली कैंटोनमेंट पुलिस स्टेशन में मौजूद थे।
पुलिस ने इन नेताओं के खिलाफ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 126 और 170 का इस्तेमाल किया था। धारा 170 पुलिस को बिना वारंट के किसी व्यक्ति को गिरफ्तार करने का अधिकार देती है, यदि उन्हें लगता है कि कोई संज्ञेय अपराध होने वाला है जिसे रोकना जरूरी है। वहीं, धारा 126 मजिस्ट्रेट को यह शक्ति देती है कि वह शांति भंग करने की आशंका वाले व्यक्ति से एक साल तक की अवधि के लिए शांति बनाए रखने का बॉन्ड भरवा सके।