हिरासत विस्तार के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट पहुंचे CJP नेता, बोले- छीनी जा रही है व्यक्तिगत आजादी

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के दो प्रमुख नेताओं, सौरव दास और आशुतोष रंका ने अपनी न्यायिक हिरासत बढ़ाने के फैसले को चुनौती देते हुए दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। नेताओं का आरोप है कि जमानत के लिए जरूरी कागजात और मुचलके (sureties) पेश करने के बावजूद उन्हें जेल में रखा गया है, जो उनके व्यक्तिगत स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार का सीधा उल्लंघन है।
यह पूरा मामला एक स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट द्वारा 19 अक्टूबर को दिए गए उस आदेश से जुड़ा है, जिसमें उनकी हिरासत बढ़ाने की बात कही गई थी। उनके वकीलों का तर्क है कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धाराओं 126 और 170 के तहत चल रही इन कार्यवाइयों में मजिस्ट्रेट का फैसला मनमाना है और कानूनी सिद्धांतों के विपरीत है।
जमानत के कागजात खारिज होने पर उठाए सवाल
कानूनी टीम ने कोर्ट को बताया कि 19 अक्टूबर को पेश किए गए नए मुचलकों को मजिस्ट्रेट ने खारिज कर दिया और उनसे यह स्पष्ट करने को कहा कि शांति भंग होने की आशंका क्यों नहीं होनी चाहिए। हैरानी की बात यह है कि इससे पहले भी जब मुचलके पेश किए गए थे, तो वेरिफिकेशन रिपोर्ट में फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) को असली और वैध पाया गया था और संबंधित व्यक्ति अपने पते पर मौजूद थे, फिर भी उन्हें स्वीकार नहीं किया गया।
वकीलों ने यह दलील भी दी कि सिर्फ मुचलकों के वेरिफिकेशन या स्वीकृति के मुद्दों के कारण किसी को हिरासत में नहीं रखा जाना चाहिए। साथ ही, उन्होंने शांति भंग होने की आशंका पर सवाल उठाते हुए कहा कि एक ऐसी जगह पर विरोध प्रदर्शन करना जिसे अब 'डिनोटिफाई' (अधिसूचना हटाना) कर दिया गया है, वह केवल रेगुलेशन का मामला होना चाहिए, न कि इसे सीधे तौर पर सार्वजनिक व्यवस्था के लिए खतरा माना जाए। उन्होंने याद दिलाया कि जंतर-मंतर को विरोध स्थल के रूप में डिनोटिफाई करने के फैसले को पहले ही सुप्रीम कोर्ट और दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी जा चुकी है।
घटनाक्रम की बात करें तो सौरव दास और आशुतोष रंका को 10 अक्टूबर को इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट के टर्मिनल 3 पर हिरासत में लिया गया था। इसके बाद उन्हें 50,000 रुपये के बॉन्ड पर रिहा किया गया। हालांकि, 13 अक्टूबर को जब वे राष्ट्रीय ध्वज लेकर जंतर-मंतर पहुंचे, तो उन्हें दोबारा हिरासत में ले लिया गया और 14 अक्टूबर को BNSS की धाराओं के तहत गिरफ्तार दिखाया गया। 19 अक्टूबर को पुलिस ने शांति भंग की आशंका जताते हुए उनकी हिरासत और बढ़ाने की मांग की थी। अब दोनों नेताओं ने अनुच्छेद 21 के तहत अपनी व्यक्तिगत स्वतंत्रता की मांग करते हुए इस आदेश को रद्द करने की अपील की है। इस मामले की सुनवाई 21 अक्टूबर को होनी तय है।