जंतर मंतर पर प्रदर्शन: CJP के दो नेताओं को 5 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा कोर्ट ने

दिल्ली की एक अदालत ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के दो बड़े नेताओं, सौरव दास और आशुतोष रंका को पांच दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया है। यह कार्रवाई 13 अक्टूबर, 2026 की सुबह जंतर मंतर पर हुए एक विरोध प्रदर्शन के दौरान उन्हें हिरासत में लिए जाने के बाद हुई है। वहीं, पार्टी के एक अन्य सदस्य अजिंक्य शिंदे को शांति बॉन्ड भरने के बाद रिहा कर दिया गया है।
मामला तब शुरू हुआ जब ये नेता राष्ट्रीय ध्वज लेकर जंतर मंतर के प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश करने की कोशिश कर रहे थे, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके के नेतृत्व में यह पार्टी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रही है। पार्टी का आरोप है कि चुनावों में अनियमितताएं बरती गई हैं।
पुलिस की दलील और वकील की आपत्ति
अदालत में सुनवाई के दौरान CJP के वकील अभिष्ट हेला ने इस रिमांड का कड़ा विरोध किया। वकील ने तर्क दिया कि पुलिस ने केवल इस आशंका के आधार पर रिमांड ले लिया कि ये लोग कोई अपराध कर सकते हैं। उन्होंने पुलिस पर गलत गवाही देने का आरोप लगाते हुए कहा कि पुलिस ने झूठा दावा किया कि नेताओं ने समर्थकों को इकट्ठा होने का आह्वान किया था।
वकील ने यह भी कहा कि नेताओं ने किसी भी बॉन्ड की शर्तों का उल्लंघन नहीं किया है। उनका आरोप है कि पुलिस ने कनॉट प्लेस की एक पुरानी शिकायत का सहारा लेकर इस वर्तमान हिरासत को सही ठहराने की कोशिश की है।
दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस का कहना है कि जंतर मंतर अब विरोध प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थल नहीं है, इसलिए वहां प्रवेश करने की कोशिश करने वालों के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई की गई। इससे पहले, इन नेताओं को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 126 और 170 के तहत हिरासत में लिया गया था और उन्हें एक साल तक शांति बनाए रखने के लिए 50,000 रुपये का बॉन्ड भरने का आदेश दिया गया था।
गौरतलब है कि यह तनाव 10 अक्टूबर को कनॉट प्लेस में हुए एक अलग वाकये के बाद और बढ़ गया, जहां धारा 163 लागू होने के बावजूद प्रदर्शनकारी जमा हुए थे और पुलिस ने पत्थरबाजी की घटनाओं का हवाला देते हुए कार्रवाई की थी।