जंतर मंतर प्रदर्शन: CJP नेताओं और पत्रकारों पर SC/ST एक्ट के तहत FIR दर्ज

दिल्ली पुलिस ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के पदाधिकारियों और दो स्वतंत्र पत्रकारों के खिलाफ अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है। यह कार्रवाई कनॉट प्लेस सब-डिवीजन में तैनात एसीपी विवेक भगत की एक औपचारिक शिकायत के बाद की गई है। एसीपी भगत, जो स्वयं अनुसूचित जाति समुदाय से आते हैं, का आरोप है कि 3 अक्टूबर 2026 को जंतर मंतर पर चुनाव आयोग के खिलाफ हो रहे एक विरोध प्रदर्शन के दौरान उनके साथ अभद्र व्यवहार किया गया और जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया गया।
इस एफआईआर में स्वतंत्र पत्रकार रोजी और गजेंद्र सिंह के साथ-साथ CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके, मुख्य प्रवक्ता सौरव दास, सह-संयोजक आशुतोष रंका और कानूनी प्रमुख रत्ना सिंह को नामजद किया गया है। शिकायत के मुताबिक, पत्रकार रोजी ने अधिकारी की नेमप्लेट देखने के बाद सार्वजनिक रूप से उनकी एसीपी पद पर नियुक्ति पर सवाल उठाए थे। पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं 221, 356(2) और 3(5) के साथ-साथ SC/ST एक्ट की विभिन्न धाराओं 3(1)(p), 3(1)(q), 3(1)(r) और 3(1)(s) के तहत केस दर्ज किया है।
आरोप-प्रत्यारोप का दौर और कानूनी उलझनें
इस मामले में जहां पुलिस कार्रवाई हुई है, वहीं दूसरी ओर पत्रकार रोजी ने एसीपी विवेक भगत पर ही विरोध प्रदर्शन के दौरान दुर्व्यवहार और यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए हैं। इस घटना के संबंध में तीन महिला पत्रकारों द्वारा पुलिसकर्मियों के खिलाफ की गई शिकायतों को आगे की जांच के लिए क्राइम ब्रांच को भेज दिया गया है, हालांकि अब तक इन आरोपों पर कोई एफआईआर दर्ज नहीं हुई है।
गौरतलब है कि CJP सदस्यों के साथ पिछले कुछ दिनों में टकराव की कई घटनाएं हुई हैं। 10 अक्टूबर 2026 को अभिजीत दीपके, आशुतोष रंका और सौरव दास को दिल्ली एयरपोर्ट से हिरासत में लिया गया था, जिन्हें अगले दिन मजिस्ट्रेट कोर्ट ने एक साल तक शांति बनाए रखने की शर्त पर रिहा किया था। इसके बाद 14 अक्टूबर 2026 को सौरव दास, आशुतोष रंका और अजिंक्य शिंदे को जंतर मंतर पर कथित तौर पर बिना अनुमति प्रवेश करने, जमानत की शर्तों का उल्लंघन करने और सरकारी काम में बाधा डालने के आरोप में गिरफ्तार किया गया। पुलिस अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति है, लेकिन कानून का उल्लंघन या अव्यवस्था बर्दाश्त नहीं की जाएगी।