CJP नेताओं की जमानत याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई, कोर्ट ने जताई नाराजगी

जंतर मंतर पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने के बाद हिरासत में लिए गए कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के दो नेताओं, सौरव दास और आशुतोष रंका की जमानत याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट ने सुनवाई की। जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद की बेंच ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए याचिकाकर्ताओं के तर्कों को सुना, लेकिन साथ ही उनकी कार्यप्रणाली पर सवाल भी उठाए।
दरअसल, ये दोनों नेता 13 अक्टूबर को जंतर मंतर पर झंडा फहराने के बाद दिल्ली पुलिस की गिरफ्त में आए थे और तब से तिहाड़ जेल में बंद हैं। उन्होंने स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) द्वारा उनकी न्यायिक हिरासत बढ़ाने के आदेशों को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। सुनवाई के दौरान जस्टिस प्रसाद ने इस बात पर कड़ी आपत्ति जताई कि याचिकाकर्ताओं ने बॉन्ड की शर्तों का उल्लंघन किया है। कोर्ट ने यह भी कहा कि वे 'जेन जेड' (Gen Z) नहीं हैं, इसलिए उन्हें नियमों की समझ होनी चाहिए।
जंतर मंतर पर प्रदर्शन और कानूनी पेच
अदालत ने स्पष्ट किया कि जंतर मंतर के डी-नोटिफिकेशन के बाद वहां जाना कानूनी रूप से गलत है। कोर्ट ने याद दिलाया कि इस डी-नोटिफिकेशन को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है, लेकिन वहां से अभी तक कोई स्टे ऑर्डर (स्थगन आदेश) नहीं मिला है। जस्टिस प्रसाद ने टिप्पणी की कि यह दूसरा मौका है जब इन लोगों ने शांति भंग करने की कोशिश की है। कोर्ट ने महसूस किया कि भले ही संगठन वही है, लेकिन उनके इरादे बदल गए हैं।
CJP नेताओं की तरफ से पेश हुए वकील अभिक चिमनी ने दलील दी कि धारा 135 के तहत जांच पूरी होने तक अंतरिम हिरासत दी जा सकती है, लेकिन हिरासत के स्वरूप और प्रकृति की समीक्षा की जानी चाहिए। वहीं, दिल्ली पुलिस की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा पेश हुए। कोर्ट ने दोनों पक्षों से यह पूछा कि क्या स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट द्वारा जारी आदेशों में किसी तरह का संशोधन किया जा सकता है।