चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के विरोध में प्रदर्शन, CJP संस्थापक ने लगाया पुलिस पिटाई का आरोप

देश की राजधानी दिल्ली में चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर जारी प्रदर्शन अब एक बड़े विवाद में बदल गया है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने दिल्ली पुलिस पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि प्रदर्शन में शामिल युवाओं, पत्रकारों और राजनेताओं के साथ पुलिस ने बर्बरता की और जरूरत से ज्यादा बल का प्रयोग किया। यह पूरा मामला मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान हुई कथित अनियमितताओं के विरोध से जुड़ा है, जिसके बाद दिल्ली पुलिस ने कड़ा रुख अपनाया है।
इस मामले में केवल CJP ही नहीं, बल्कि अन्य दिग्गज नेता भी सामने आए हैं। CPM के राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिटास ने आरोप लगाया कि उन्हें पुलिस ने जबरन घसीटा, उठाया और एक वाहन के अंदर उनके साथ मारपीट की, जबकि वह मीडिया से बात कर रहे थे। ब्रिटास ने इस घटना को संसदीय विशेषाधिकार का उल्लंघन और शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार का हनन बताते हुए भारत के मुख्य न्यायाधीश, राष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति से स्वतंत्र जांच की मांग की है। वहीं, ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन की अध्यक्ष नेहा बोरा ने भी पुलिस हिरासत के दौरान मारपीट का आरोप लगाया है।
हिरासत में बदसलूकी और कानूनी लड़ाई
CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके, जिन्हें 10 अक्टूबर 2026 को उनके साथियों आशुतोष रंका और सौरव दास के साथ हिरासत में लिया गया था, ने पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। दिपके का आरोप है कि जब उन्हें उनकी दादी की मृत्यु की खबर दी गई, तब उन्हें कानूनी सलाहकार और परिवार से बात करने की अनुमति नहीं दी गई। उन्होंने यह भी दावा किया कि सुबह 3:30 बजे उन्हें जबरन गिरफ्तारी के दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने के लिए मजबूर किया गया और उनके अनुरोध के वीडियो सबूत भी मिटा दिए गए।
हालांकि, दिल्ली पुलिस ने इन तमाम आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। डीसीपी नेहा यादव ने वीडियो सबूत पेश करते हुए कहा कि दिपके को उनकी पारिवारिक क्षति की सूचना समय पर दी गई थी और उन्हें मदद की पेशकश भी की गई, जिसे उन्होंने ठुकरा दिया।
इस बीच, सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में हस्तक्षेप करते हुए निर्देश दिया है कि बिना हथियार वाले शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को तब तक हिरासत में नहीं लिया जाना चाहिए जब तक कि वह कानून के दायरे में न हो। कोर्ट ने मेट्रो, रेलवे सेवाओं और इंटरनेट कनेक्टिविटी को सामान्य करने के आदेश भी दिए हैं। दूसरी ओर, राहुल गांधी सहित कई विपक्षी नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा है कि सरकार चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को बचाने के लिए राज्य की शक्ति का इस्तेमाल कर रही है और असहमति की आवाज को दबाने की कोशिश कर रही है।
CJP ने अब इस आंदोलन को देशव्यापी बनाने का ऐलान किया है, जबकि इंडिया गठबंधन सुप्रीम कोर्ट तक मार्च करने की तैयारी कर रहा है।