अभिजीत दिपके की गिरफ्तारी को CJP ने कोर्ट में चुनौती दिया अवैध, रिहाई की मांग

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके की गिरफ्तारी ने अब कानूनी मोड़ ले लिया है। पार्टी की कानूनी मामलों की प्रमुख रत्ना सिंह ने दिल्ली की स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) कोर्ट में इस गिरफ्तारी को चुनौती देते हुए दिपके की तत्काल रिहाई की मांग की है। रत्ना सिंह का दावा है कि दिपके की गिरफ्तारी के दौरान कानूनी प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया और उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन हुआ है।
रत्ना सिंह ने आरोप लगाया कि अभिजीत दिपके को उनके घर के बाहर से उठाया गया और उनकी लोकेशन के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई, जिससे उनके कानूनी सलाहकारों के लिए उनसे मिलना नामुमकिन हो गया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी बात रखते हुए सिंह ने सवाल उठाया कि केवल तिरंगा फहराने की अपील करना कोई अपराध कैसे हो सकता है। उन्होंने कोर्ट से अपील की है कि इस गैरकानूनी हिरासत को खत्म कर उन्हें तुरंत रिहा किया जाए।
तिरंगा यात्रा और पुलिस की कार्रवाई
दरअसल, दिल्ली पुलिस ने 16 अक्टूबर 2026 को राजधानी में आयोजित एक फ्लैग मार्च के बाद अभिजीत दिपके को 'निवारक गिरफ्तारी' (preventive arrest) के तहत हिरासत में लिया था। पुलिस का कहना है कि दिपके ने कनॉट प्लेस में 'तिरंगा यात्रा' रैली निकाली थी, जबकि उन्हें पहले ही नोटिस दिया गया था कि वह विरोध प्रदर्शन के लिए निर्धारित क्षेत्र नहीं है और वहां NDMC से कोई अनुमति नहीं ली गई थी। शांति भंग होने की आशंका को देखते हुए पुलिस ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 126 और 170 के तहत यह कार्रवाई की है।
यह पूरा मामला उस समय सामने आया जब CJP, छात्र संगठनों और विपक्षी दलों ने चुनावी अनियमितताओं के खिलाफ प्रदर्शन किया और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की। दिपके से पहले पार्टी के सह-संयोजक सौरव दास और आशुतोष रंका को भी जंतर मंतर पर झंडा फहराने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था, जिन्हें 13 अक्टूबर को पांच दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। वहीं, ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन की अध्यक्ष नेहा बोरा को भी हिरासत में लिया गया था, हालांकि उन्हें 12 घंटे बाद छोड़ दिया गया।