CJP कार्यकर्ताओं की जमानत खारिज, सौरav दास और आशुतोष रंका फिर भेजे गए न्यायिक हिरासत में

दिल्ली के मंदिर मार्ग पुलिस स्टेशन से कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के दो कार्यकर्ताओं, सौरव दास और आशुतोष रंका को एक बार फिर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। सोमवार को कोर्ट में उनकी जमानत के लिए पेश किए गए मुचलकों (surety) को दस्तावेजों में कथित विसंगतियों के आधार पर खारिज कर दिया गया, जिसके बाद उन्हें वापस जेल भेज दिया गया।
CJP की कानूनी मामलों की प्रमुख रत्ना सिंह ने इस पूरी प्रक्रिया पर कड़ा ऐतराज जताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह केवल एक बहाना है और वास्तव में व्यक्तिगत स्वतंत्रता को बाधित किया जा रहा है। सिंह ने कहा कि पिछले छह दिनों से जमानत की प्रक्रिया में छोटी-छोटी कमियां निकालकर उसे लटकाया जा रहा है। उन्होंने इसे एक तरह की मानसिक प्रताड़ना और आवाजों को दबाने की कोशिश करार दिया।
दस्तावेजों में गड़बड़ी और कानूनी बहस
कार्यकर्ताओं का प्रतिनिधित्व कर रहे वकील अभिक चिमनी ने अपनी निराशा व्यक्त करते हुए कहा कि यह मामला प्रिवेंटिव कस्टडी (निवारक हिरासत) से जुड़ा है। उन्होंने बताया कि कोर्ट ने पहले ही यह माना था कि आरोपियों को न्यायिक हिरासत में रखना जरूरी नहीं है, इसीलिए मुचलके मांगे गए थे। लेकिन जब मुचलके पेश किए गए, तो पहले एक समस्या निकाली गई और फिर दूसरे मुचलके में तस्वीरों के मेल न खाने (mismatch) का हवाला देकर उसे खारिज कर दिया गया।
वकील पुष्प शर्मा ने मामले की गंभीरता पर बात करते हुए कहा कि बचाव पक्ष ने अधिकारियों से उन विशिष्ट कॉल रिकॉर्ड्स और कानूनी प्रावधानों की मांग की थी, जिनके आधार पर यह कार्रवाई की गई। हालांकि, अधिकारियों ने कोई ठोस जवाब नहीं दिया और केवल यह कह दिया कि जानकारी सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध है।
बचाव पक्ष का यह भी आरोप है कि आदेश सुनाने में अनावश्यक देरी की गई। उनके अनुसार, जिस आदेश को आधे घंटे में सुनाया जाना था, उसमें तीन घंटे लगाए गए और इस दौरान अधिकारियों ने फोन पर लंबी बात की। कानूनी टीम ने स्पष्ट किया है कि वे इस फैसले को चुनौती देंगे और इस लड़ाई को आगे ले जाएंगे।