जंतर मंतर पर प्रदर्शन न करने का CJP कार्यकर्ताओं ने दिया वचन, कोर्ट ने दी रिहाई

दिल्ली के जंतर मंतर पर विरोध प्रदर्शनों को लेकर चल रहे विवाद के बीच एक अहम मोड़ आया है। स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) कोर्ट ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के दो कार्यकर्ताओं, सौरव दास और आशुतोष रंका को रिहा करने का आदेश दिया है। हालांकि, यह रिहाई एक कड़ी शर्त के साथ मिली है। दोनों कार्यकर्ताओं ने अदालत में लिखित आश्वासन दिया है कि वे शांति व्यवस्था भंग नहीं करेंगे और जब तक जंतर मंतर को डी-नोटिफाई नहीं कर दिया जाता, तब तक वहां किसी भी विरोध प्रदर्शन का आह्वान नहीं करेंगे।
कोर्ट की कार्यवाही के दौरान मजिस्ट्रेट रितु राज ने यह स्पष्ट किया कि आरोपियों को 50,000 रुपये का व्यक्तिगत बॉन्ड और जमानत बॉन्ड भरने का निर्देश दिया गया है। अदालत ने कहा कि जांच पूरी होने तक यह बॉन्ड प्रभावी रहेंगे। कोर्ट ने तिहाड़ जेल के अधीक्षक को रिहाई वारंट जारी करने का आदेश दिया है, ताकि इन कार्यकर्ताओं को जल्द से जल्द छोड़ा जा सके।
पुलिस ने जताई थी आशंका, कोर्ट ने माना बॉन्ड पर्याप्त
इस मामले में पुलिस की दलीलें काफी सख्त थीं। जांच अधिकारी (IO) ने अदालत से अनुरोध किया था कि आरोपियों की न्यायिक हिरासत को 3 दिनों के लिए और बढ़ा दिया जाए। पुलिस का तर्क था कि कार्यकर्ताओं के बयानों और मीडिया में उनके स्टैंड को देखते हुए यह आशंका है कि वे दोबारा शांति भंग कर सकते हैं। पुलिस ने यह भी आरोप लगाया कि कोर्ट के सामने उनकी बातें और मीडिया के सामने उनके बयान एक-दूसरे के विपरीत हैं।
हालांकि, बचाव पक्ष के वकीलों की दलीलों और कार्यकर्ताओं द्वारा दिए गए लिखित वचन के बाद कोर्ट ने माना कि वर्तमान परिस्थितियों में शांति बनाए रखने के लिए बॉन्ड और लिखित आश्वासन पर्याप्त हैं। कोर्ट ने टिप्पणी की कि अब उन्हें आगे न्यायिक हिरासत में रखने की आवश्यकता नहीं है।
सौरव दास ने अपने लिखित बयान में कहा, "मैं शांति भंग न करने का वादा करता हूं। मुझे न्यायपालिका और इस अदालत पर पूरा भरोसा है। हम यह स्पष्ट करते हैं कि जब तक कानूनन जंतर मंतर को डी-नोटिफाई नहीं किया जाता, हम वहां किसी प्रदर्शन की अपील नहीं करेंगे। भविष्य में कोई भी विरोध प्रदर्शन केवल संवैधानिक दायरे में रहकर ही किया जाएगा।"
अब अदालत ने जांच अधिकारी को अगली सुनवाई तक जमानतदारों की वेरिफिकेशन रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। इस मामले की अगली सुनवाई 23 अक्टूबर को दोपहर 3 बजे तय की गई है, जिसमें आरोपियों और उनके जमानतदारों की उपस्थिति अनिवार्य होगी।