जंतर मंतर में घुसने की कोशिश, दिल्ली पुलिस ने CJP के तीन कार्यकर्ताओं को लिया हिरासत में

देश की राजधानी दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों का केंद्र रहे जंतर मंतर को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। मंगलवार सुबह 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के कार्यकर्ताओं ने जंतर मंतर में प्रवेश करने की कोशिश की, जिसके बाद दिल्ली पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। पुलिस ने इस कार्रवाई के दौरान सौरव दास, आशुतोष रंका और अजिंक्य शिंदे सहित अन्य टीम सदस्यों को पकड़ा।
यह पूरा मामला तब शुरू हुआ जब सरकार ने जंतर मंतर को आधिकारिक तौर पर विरोध प्रदर्शन स्थल (Protest Spot) की सूची से हटा दिया। इस फैसले के खिलाफ CJP के कार्यकर्ता तिरंगा लेकर सुबह-सुबह जंतर मंतर में दाखिल होने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन पुलिस ने घेराबंदी कर उन्हें रोक लिया और हिरासत में ले लिया। CJP के अभिजीत डिपके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इस घटना की जानकारी देते हुए लिखा कि प्रतिरोध को इस तरह खत्म नहीं किया जा सकता। वहीं, कार्यकर्ता आशुतोष रंका ने भी जंतर मंतर को छोड़ने की मांग की।
लोकतंत्र और विरोध के अधिकार पर छिड़ी जंग
जंतर मंतर को विरोध स्थल से हटाने के फैसले ने राजनीतिक माहौल गरमा दिया है। अभिजीत डिपके ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि जंतर मंतर सिर्फ एक जगह नहीं, बल्कि प्रतिरोध की भावना है। उन्होंने आरोप लगाया कि अगर सरकार को लगता है कि जगह बदलने से विरोध खत्म हो जाएगा, तो वह गलत है।
इस मुद्दे पर कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने भी सरकार की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि यह कदम प्रधानमंत्री और गृह मंत्री की घबराहट को दर्शाता है। रमेश के मुताबिक, सरकार लोकतांत्रिक विरोधों को दबाना चाहती है और अब लोकतंत्र की जगह सिर्फ 'कुर्सी' (Demokursi) मायने रखती है।
गौरतलब है कि गृह मंत्रालय द्वारा गठित एक समिति की सिफारिशों के बाद जंतर मंतर को डी-नोटिफाई किया गया है। अब दिल्ली पुलिस ने विरोध प्रदर्शनों के लिए तीन नए स्थानों का निर्धारण किया है, जिनमें रामलीला मैदान, बुराड़ी ग्राउंड और पूर्वी दिल्ली का CBD ग्राउंड शामिल हैं। सरकार का तर्क है कि नागरिकों के विरोध प्रदर्शन के अधिकार के लिए वैकल्पिक स्थलों की जरूरत थी, इसलिए यह बदलाव किया गया है।