जंतर मंतर पर विरोध की कोशिश: दिल्ली पुलिस ने CJP कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया

देश की राजधानी में एक बार फिर विरोध प्रदर्शन और पुलिसिया कार्रवाई का दौर शुरू हो गया है। मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026 को जंतर मंतर पर अपना विरोध जताने पहुंचे कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के सदस्यों को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ले लिया। इस कार्रवाई के दौरान CJP के प्रमुख नेताओं सौरव दास, आशुतोष रंका और अजिंक्य शिंदे समेत कई कार्यकर्ताओं को पुलिस ने पकड़ा। पुलिस ने इन प्रदर्शनकारियों को पहले जफ़रपुर कलां थाने ले जाया गया, जहाँ उन्हें करीब 17 घंटे तक रखा गया और बाद में उन्हें संसद मार्ग पुलिस स्टेशन ट्रांसफर कर दिया गया।
पुलिस ने इन कार्यकर्ताओं के खिलाफ अनधिकृत प्रवेश और शांति बंधन (Peace Bond) के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज की है। इस पूरे मामले में तनाव तब और बढ़ गया जब जफ़रपुर कलां थाने के बाहर CJP के समर्थकों की भीड़ जमा हो गई, जिसके बाद पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी। CJP की लीगल विंग की सदस्य रत्ना सिंह ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि हिरासत में लिए गए लोगों को उनके वकीलों से मिलने नहीं दिया गया और उनके मोबाइल फोन भी जब्त कर लिए गए।
जंतर मंतर को लेकर छिड़ी कानूनी जंग
दरअसल, यह पूरा विवाद जंतर मंतर को विरोध प्रदर्शन स्थल के रूप में उपयोग करने को लेकर है। केंद्रीय गृह मंत्रालय की एक समिति की सिफारिशों के बाद दिल्ली पुलिस ने जंतर मंतर को प्रदर्शन स्थल के रूप में 'डी-नोटिफाई' कर दिया है। अब प्रदर्शनकारियों को रामलीला मैदान, बुराड़ी ग्राउंड और सीबीडी ग्राउंड जैसे वैकल्पिक स्थानों पर जाने का निर्देश दिया गया है। हालांकि, CJP के संस्थापक अभिजीत डिपके ने इस कार्रवाई की कड़ी निंदा की है और साफ कहा है कि जगह चाहे कोई भी हो, उनका आंदोलन जारी रहेगा।
इस बीच, यह मामला अब अदालतों की दहलीज पर भी है। सुप्रीम कोर्ट उन याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है जिनमें 10 अक्टूबर को हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान मेट्रो सेवाओं और सार्वजनिक परिवहन को बाधित करने और लोगों की हिरासत के मुद्दे उठाए गए हैं। जस्टिस की तबीयत खराब होने के कारण इस सुनवाई को अब 15 अक्टूबर तक के लिए टाल दिया गया है। वहीं, दिल्ली हाई कोर्ट ने भी जंतर मंतर को सार्वजनिक प्रदर्शनों के लिए बंद करने के फैसले के खिलाफ दायर एक याचिका पर विचार करने की सहमति जताई है।