चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन: दिल्ली पुलिस ने CJP कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया, इसे 'तानाशाही' बताया

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में चुनाव आयोग के खिलाफ विरोध प्रदर्शन की ডাক देने वाले CJP (Citizens for Justice and Peace) के कार्यकर्ताओं को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। पुलिस का कहना है कि इस प्रदर्शन के लिए कोई कानूनी अनुमति नहीं दी गई थी, जिसके चलते यह कार्रवाई की गई। इस बीच, कार्यकर्ताओं ने पुलिस के इस कदम की कड़ी निंदा करते हुए इसे 'तानाशाही' करार दिया है।
CJP कार्यकर्ता अभिजीत दिपके, जो मुंबई से दिल्ली पहुंचे थे, ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो साझा किया। वीडियो में दावा किया गया कि जैसे ही उनका विमान दिल्ली एयरपोर्ट पर उतरा, दिल्ली पुलिस के अधिकारी विमान के अंदर ही घुस आए और उन्हें हिरासत में लेने की कोशिश करने लगे। दिपके ने वीडियो में कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वालों के साथ अपराधियों जैसा व्यवहार किया जा रहा है और यह स्थिति आपातकाल के समय इंदिरा गांधी के दौर से भी बदतर है।
वहीं, CJP की लीगल हेड रत्ना सिंह ने भी अपना अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि पुलिस सुबह उनके घर पहुंची और उन्हें हिरासत में लेने की बात कही। रत्ना सिंह के अनुसार, जब उन्होंने आधिकारिक नोटिस मांगा, तो पुलिस के पास कुछ नहीं था। उन्होंने दावा किया कि उन्हें उनकी कार के अंदर ही रोक लिया गया और सड़क पर अवैध रूप से हिरासत में रखा गया। इसके अलावा, CJP ने दावा किया है कि कंटेंट क्रिएटर ध्रुव राठी को भी हिरासत में लिया गया है।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम और 500 लोग हिरासत में
दिल्ली पुलिस ने शनिवार को बताया कि विभिन्न स्थानों से समूहों में आए लगभग 500 लोगों को हिरासत में लिया गया है। इसके साथ ही, करीब 50 ऐसे व्यक्तियों को भी पकड़ा गया है जिनका आपराधिक इतिहास रहा है, ताकि शहर का माहौल खराब न हो। सुरक्षा व्यवस्था को पुख्ता करने के लिए नई दिल्ली जिले को 20 ऑपरेशनल जोन में बांटा गया था और हर जोन के लिए अलग डिटेंशन सेंटर बनाए गए थे।
जंतर मंतर और संसद मार्ग पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया और जगह-जगह बैरिकेडिंग की गई। सुरक्षा कारणों से दिल्ली के 46 मेट्रो स्टेशनों को बंद रखा गया और शहर के प्रवेश द्वारों पर कड़ी निगरानी रखी गई। पुलिस का कहना है कि जुलाई में हुए प्रदर्शनों जैसी स्थिति दोबारा न बने, इसलिए ये एहतियाती कदम उठाए गए हैं। दूसरी ओर, CJP के कार्यकर्ता अपनी मांग पर अडिग हैं और चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन जारी रखने की बात कह रहे हैं।