CJP कार्यकर्ताओं की रिहाई के लिए दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका, आज होगी सुनवाई

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के दो कार्यकर्ताओं, सौरव दास और आशुतोष रंका ने अपनी हिरासत को चुनौती देते हुए दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। इन दोनों कार्यकर्ताओं ने स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसके तहत उनकी न्यायिक हिरासत बढ़ाई गई थी। मामले की गंभीरता और तात्कालिकता को देखते हुए हाई कोर्ट ने बुधवार को ही इस याचिका पर सुनवाई करने का फैसला किया है।
पूरी घटना की शुरुआत 13 अक्टूबर को हुई, जब इन कार्यकर्ताओं ने जंतर मंतर पर विरोध प्रदर्शन किया था। बता दें कि जंतर मंतर को विरोध प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थल की सूची से हटा दिया गया था, जिसके बाद वहां प्रदर्शन किया गया। पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया और अब वे तब से जेल में हैं। याचिका में दावा किया गया है कि उनकी हिरासत पूरी तरह से गैरकानूनी है और यह उनके व्यक्तिगत स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार का उल्लंघन है।
हिरासत बढ़ाने के आदेश पर उठाए सवाल
याचिकाकर्ताओं ने 19 अक्टूबर को स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट द्वारा जारी उस आदेश को रद्द करने की मांग की है, जिसमें भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 126 और 170 के तहत उनकी हिरासत 21 अक्टूबर तक बढ़ा दी गई थी। याचिका में यह गंभीर आरोप लगाया गया है कि वे 13 अक्टूबर से हिरासत में हैं और उन्होंने रिहाई के लिए कई बार जमानतदार (sureties) पेश किए, लेकिन उन्हें स्वीकार नहीं किया गया।
plea में कहा गया है कि 19 अक्टूबर को भी अतिरिक्त जमानतदार बांड और फिक्स्ड डिपॉजिट रसीदों के साथ मौजूद थे, लेकिन उन्हें पेश करने की अनुमति नहीं दी गई। कानूनी दलीलों में यह भी कहा गया है कि BNSS की धारा 135(3) पुलिस के आवेदन पर हिरासत बढ़ाने की स्वतंत्र शक्ति नहीं देती है, बल्कि यह केवल बांड निष्पादित करने में चूक होने पर लागू होती है।
कार्यकर्ताओं का तर्क है कि पुलिस जिन आरोपों का सहारा ले रही है, वे पुरानी घटनाओं से जुड़े हैं और ऐसा कोई तात्कालिक खतरा नहीं है जिसके कारण उन्हें जेल में रखना जरूरी हो। अब दिल्ली हाई कोर्ट यह तय करेगा कि उनकी हिरासत कानूनी रूप से सही है या उन्हें तुरंत रिहा किया जाना चाहिए।