'हमें डर नहीं': CJP कार्यकर्ताओं ने जताया NSA के तहत गिरफ्तारी का अंदेशा, सरकार को दी चुनौती

दिल्ली में सक्रिय कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया है कि उन्हें जल्द ही गिरफ्तार किया जा सकता है। CJP कार्यकर्ता आशुतोष रंका ने सोमवार को कहा कि उन्हें, सौरभ दास और अभिजीत दिपके को 10 अक्टूबर से पहले राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) या इसी तरह के अन्य कड़े प्रावधानों के तहत जेल भेजा जा सकता है। रंका ने स्पष्ट किया कि वे तीनों जून से ही जेल जाने के लिए तैयार हैं और उन्हें किसी भी सरकारी कार्रवाई का कोई डर नहीं है।
आशुतोष रंका ने सोशल मीडिया के जरिए अपनी बात रखते हुए कहा कि उन्हें कई सूत्रों से जानकारी मिली है कि प्रशासन उनके खिलाफ कार्रवाई की योजना बना रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार उनके आंदोलन से डरी हुई है और इसी डर की वजह से हिंसा और दमन का सहारा ले रही है। रंका ने महात्मा गांधी का जिक्र करते हुए कहा कि हिंसा और नफरत डर से पैदा होती है, और सरकार इस समय डरी हुई है। उन्होंने आगे कहा कि वे महज 30 साल के युवा हैं जो एक बेहतर और जवाबदेह भारत के लिए लड़ रहे हैं, इसलिए उनके पास खोने के लिए कुछ नहीं है।
लोकतंत्र बचाने की लड़ाई और विरोध प्रदर्शन
इस मामले में एक अन्य कार्यकर्ता अभिजीत दिपके ने कहा कि सरकार चाहे UAPA या NSA का डर दिखाए, वे चुप नहीं बैठेंगे। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र को बचाने की इस लड़ाई में वे सालों तक जेल काटने को तैयार हैं, लेकिन पीछे नहीं हटेंगे। वहीं, सौरभ दास ने सरकार की इस संभावित कार्रवाई को 'तानाशाही' करार देते हुए कहा कि आज की युवा पीढ़ी जागरूक हो चुकी है और इस तरह के कदमों को बर्दाश्त नहीं करेगी।
यह पूरा विवाद मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर शुरू हुआ है। CJP और अन्य प्रदर्शनकारी चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं। इस बीच, कार्यकर्ताओं ने देशवासियों से अपील की है कि वे 10 अक्टूबर से शुरू होने वाले बड़े विरोध प्रदर्शन का हिस्सा बनें और अपने अधिकारों के लिए लड़ें।
गौरतलब है कि यह विवाद तब गहराया जब एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि अन्य चुनाव आयुक्तों ने मतदाता सूची और तकनीकी प्रणालियों को लेकर कई बार आपत्तियां जताई थीं, हालांकि चुनाव आयोग ने इन दावों को खारिज करते हुए इसे प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा बताया है।