सिर्फ नल लगाना काफी नहीं, पानी की उपलब्धता और शुद्धता जरूरी: CJI सूर्य कांत

नेशनल ह्यूमन राइट्स कमीशन (NHRC) के स्थापना दिवस के मौके पर आयोजित एक विशेष सम्मेलन में चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्य कांत ने मानवाधिकारों और पानी की उपलब्धता के बीच गहरे संबंध पर जोर दिया। 'वॉटर - द एलिक्सिर ऑफ लाइफ' विषय पर आधारित इस कार्यक्रम में CJI ने स्पष्ट किया कि पानी तक पहुंच का मतलब केवल घरों में नल का कनेक्शन देना नहीं होना चाहिए, बल्कि यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि उन नलों में पानी वास्तव में उपलब्ध हो और वह पीने योग्य हो।
CJI सूर्य कांत ने बेहद कड़े शब्दों में कहा कि एक सूखा पाइप पानी की पहुंच के वादे को पूरा नहीं कर सकता। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि पानी आर्सेनिक, फ्लोराइड या अन्य हानिकारक तत्वों से दूषित है, तो वह सेवा नहीं बल्कि जीवन और स्वास्थ्य के लिए एक बड़ा खतरा है। उनके अनुसार, सुरक्षित और भरोसेमंद पानी की उपलब्धता मानवीय गरिमा को बनाए रखने और संवैधानिक अधिकारों को पूरा करने के लिए अनिवार्य है।
पानी का अधिकार और संवैधानिक गरिमा
अपने संबोधन के दौरान CJI ने बताया कि पानी केवल एक बुनियादी जरूरत नहीं है, बल्कि यह स्वास्थ्य, शिक्षा और गरिमापूर्ण जीवन की नींव है। उन्होंने कहा कि जिस समुदाय के पास पानी की विश्वसनीय पहुंच नहीं है, वह उस गरिमा का पूरी तरह आनंद नहीं ले सकता जिसका वादा हमारा संविधान करता है। इसलिए, पानी के अधिकार को किसी अलग entitlement के रूप में नहीं, बल्कि एक ऐसी शर्त के रूप में देखा जाना चाहिए जो अन्य सभी अधिकारों की पूर्ति को संभव बनाती है।
उन्होंने इस चुनौती से निपटने के लिए एक सामूहिक दृष्टिकोण की आवश्यकता पर बल दिया। CJI ने कहा कि सरकारों को जल प्रणालियों का निर्माण और रखरखाव करना चाहिए, जबकि अदालतों को तब हस्तक्षेप करना चाहिए जब संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन हो। साथ ही, मानवाधिकार आयोगों की यह जिम्मेदारी है कि वे शिकायतों की जांच करें और व्यवस्था की खामियों को उजागर करें। उन्होंने भविष्य की पीढ़ियों के प्रति जिम्मेदारी जताते हुए नदियों को प्रदूषित करने और भूजल स्तर को गिराने के खिलाफ चेतावनी भी दी।
NHRC की उपलब्धियों पर चर्चा करते हुए CJI सूर्य कांत ने बताया कि आयोग ने अपने 33 साल के सफर में 24 लाख से अधिक मामले दर्ज किए और 23 लाख से ज्यादा मामलों का निपटारा किया है, जो कि 98 प्रतिशत से अधिक की दर है। उन्होंने NHRC को संविधान के वादों का रक्षक बताया, जो उन लोगों की आवाज बनता है जो आसानी से अदालतों तक नहीं पहुंच पाते।
अंत में, उन्होंने हाशिए पर रहने वाले समुदायों, विचाराधीन कैदियों, प्रवासी श्रमिकों, बुजुर्गों, दिव्यांगों और महिलाओं के अधिकारों की सुरक्षा की बात कही। उन्होंने NHRC द्वारा मोबाइल ऐप लॉन्च करने और रिकॉर्ड्स के डिजिटलीकरण की सराहना की, जिससे अब नागरिक आसानी से अपनी शिकायतें दर्ज करा सकेंगे और उनकी प्रगति को ट्रैक कर पाएंगे।