CJI ने राहुल गांधी और खड़गे की मुलाकात से किया इनकार, कहा- न्यायिक प्रक्रिया अपनाएं

भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे की मुलाकात की मांग को अस्वीकार कर दिया है। CJI ने उन्हें एक पत्र लिखकर स्पष्ट किया है कि जिन मुद्दों पर वे ज्ञापन सौंपना चाहते थे, वे पहले से ही सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं, इसलिए इस तरह की बैठक करना उचित नहीं होगा।
विपक्ष के नेताओं ने सोमवार, 12 अक्टूबर को शाम 4 से 5 बजे के बीच CJI से मिलने का समय मांगा था। वे मुख्य चुनाव आयुक्त, चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, छात्रों की कथित मनमानी गिरफ्तारियों, मेट्रो स्टेशनों को बंद करने और ट्रेनों के रद्दीकरण जैसे गंभीर मुद्दों पर एक ज्ञापन सौंपना चाहते थे।
शक्तियों के पृथक्करण का हवाला
CJI ने अपने पत्र में कहा कि लंबित मामलों पर चर्चा के लिए बैठक बुलाना 'शक्तियों के पृथक्करण' (Separation of Powers) के सिद्धांत के खिलाफ होगा, जो संविधान की एक बुनियादी विशेषता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह न्यायिक मर्यादा के अनुकूल नहीं है। CJI ने स्पष्ट किया कि संवैधानिक ढांचे के तहत सुप्रीम कोर्ट के पास इन मुद्दों को प्रशासनिक स्तर पर निपटाने की शक्तियां नहीं हैं।
हालांकि, उन्होंने यह आश्वासन दिया कि सुप्रीम कोर्ट संविधान के अनुच्छेद 32 और न्यायिक समीक्षा की अपनी शक्तियों के तहत नागरिकों की शिकायतों को सुनने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने सुझाव दिया कि प्रशासनिक स्तर पर ज्ञापन सौंपने के बजाय, विपक्ष को कोर्ट की न्यायिक शक्तियों का उपयोग करना चाहिए।
CJI ने यह भी जानकारी दी कि इसी तरह के कुछ मामलों की सुनवाई मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026 को होनी तय है। उन्होंने राहुल गांधी और खड़गे को सलाह दी कि वे अपनी याचिकाएं भौतिक रूप से या ई-फाइलिंग के जरिए जमा कर सकते हैं, जिस पर कानून के अनुसार जल्द से जल्द सुनवाई की जाएगी।