वोटर लिस्ट विवाद: CJI सूर्य कांत ने INDIA गठबंधन के नेताओं से मिलने से किया इनकार

भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत ने मतदाता सूची के पुनरीक्षण (Electoral Roll Revision) के मुद्दे पर INDIA गठबंधन के नेताओं से मिलने की request को औपचारिक रूप से ठुकरा दिया है। यह फैसला उस समय आया है जब विपक्षी दल चुनाव आयोग की प्रक्रिया को चुनौती देने के लिए सुप्रीम कोर्ट की ओर कूच करने की तैयारी में थे। CJI कार्यालय ने ईमेल के जरिए यह जानकारी दी कि वह 12 अक्टूबर 2026 को प्रस्तावित बैठक के लिए उपलब्ध नहीं होंगे।
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे सहित कई बड़े नेताओं ने शाम 4 से 5 बजे के बीच मुलाकात का समय मांगा था। हालांकि, मुख्य न्यायाधीश कार्यालय ने न्यायिक मर्यादा (judicial propriety), शक्तियों के पृथक्करण और इस तथ्य का हवाला दिया कि संबंधित मामले अभी अदालत के विचाराधीन (sub judice) हैं, इसलिए ऐसी मुलाकात संभव नहीं है।
क्या है पूरा विवाद और क्यों मचा है हंगामा?
विवाद की जड़ चुनाव आयोग द्वारा चलाया जा रहा 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (Special Intensive Revision) अभियान है। आयोग का दावा है कि वह मतदाता सूचियों को शुद्ध कर रहा है। आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, ड्राफ्ट लिस्ट में करीब 13.3 करोड़ नामों को अलग-अलग श्रेणियों में रखा गया है, जिसमें 2.8 करोड़ मृत व्यक्ति, 3 करोड़ अनुपस्थित या अप्राप्य लोग, 6.3 करोड़ स्थानांतरित व्यक्ति और 1 करोड़ डुप्लिकेट प्रविष्टियां शामिल हैं। हालांकि, चुनाव आयोग ने साफ किया है कि ये अंतिम तौर पर हटाए गए नाम नहीं हैं और पात्र मतदाता दावे व आपत्तियों के जरिए दोबारा पंजीकरण करा सकते हैं।
दूसरी तरफ, INDIA गठबंधन और 'कॉकरोच जनता पार्टी' जैसे युवा समूहों का आरोप है कि इस प्रक्रिया के जरिए बड़े पैमाने पर मतदाताओं को वंचित किया जा रहा है। उनका दावा है कि इसका सबसे ज्यादा असर प्रवासियों, खास समुदायों और विपक्ष के समर्थकों पर पड़ा है। कुछ विश्लेषणों के अनुसार, दिल्ली जैसे राज्यों में करीब 32 प्रतिशत तक नाम हटाए गए हैं।
इस मुद्दे पर पिछले सप्ताहांत दिल्ली में भारी विरोध प्रदर्शन हुए, जिसके बाद प्रशासन ने हजारों लोगों को हिरासत में लिया और मेट्रो व इंटरनेट सेवाओं में बाधा डाली। इस स्थिति पर सुप्रीम कोर्ट की एक विशेष पीठ (जस्टिस जोयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना) ने 11 अक्टूबर को हस्तक्षेप करते हुए निर्देश दिया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की अवैध हिरासत न हो और कानून-व्यवस्था के दायरे में मेट्रो व इंटरनेट सेवाएं बहाल रखी जाएं।
अब जब CJI ने प्रशासनिक मुलाकात से इनकार कर दिया है, विपक्ष का पूरा ध्यान औपचारिक कानूनी याचिकाओं पर केंद्रित हो गया है। वहीं, कॉकरोच जनता पार्टी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और पेपर बैलेट वापस लाने की मांग कर रही है। INDIA गठबंधन आज भी सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च कर इस प्रक्रिया को 'वोट चोरी' बताते हुए एक ज्ञापन सौंपने की तैयारी में है।