मजदूरों की हुंकार: CITU ने 1-3 दिसंबर को दिल्ली में 'चलो पार्लियामेंट' प्रदर्शन का किया आह्वान

देशभर के मजदूरों और कामगारों की आवाज बुलंद करने के लिए सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियंस (CITU) ने एक बड़ा ऐलान किया है। संगठन ने 1 दिसंबर से 3 दिसंबर 2026 तक नई दिल्ली में 'चलो पार्लियामेंट' विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया है। इस बड़े जमावड़े के जरिए मजदूर अपनी मांगों और समस्याओं को सीधे सांसदों और केंद्र सरकार के सामने रखने की तैयारी में हैं।
CITU के आंध्र प्रदेश महासचिव ए.वी. नागेश्वर राव और विशाखापट्टनम जिला महासचिव आर.के.एस.वी. कुमार के अनुसार, वर्तमान में मजदूरों पर "नीतिगत हमलों" का दौर चल रहा है। यूनियन का आरोप है कि एक तरफ जहां कॉर्पोरेट जगत का मुनाफा आसमान छू रहा है, वहीं दूसरी तरफ सार्वजनिक संसाधनों को निजी हाथों में सौंपा जा रहा है, जिससे आम कामगारों का जीवन कठिन होता जा रहा है।
मजदूरों की मुख्य मांगें और विरोध की वजह
इस प्रदर्शन के माध्यम से CITU सरकार पर कई महत्वपूर्ण मोर्चों पर दबाव बनाने की योजना बना रहा है। यूनियन की प्रमुख मांगों में शामिल हैं:
- वर्तमान लेबर कोड्स (Labour Codes) को पूरी तरह वापस लिया जाए।
- 45वें और 46वें भारतीय श्रम सम्मेलन (ILC) की सर्वसम्मति से की गई सिफारिशों को लागू किया जाए।
- सरकारी संस्थानों के निजीकरण की प्रक्रिया पर पूरी तरह रोक लगाई जाए।
- मजदूरी में वृद्धि, नौकरी की सुरक्षा और कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स (ठेका मजदूरों) के नियमितीकरण की व्यवस्था हो।
इसके अलावा, यूनियन ने स्कीम वर्कर्स (योजना कर्मियों) को आधिकारिक मजदूर के रूप में मान्यता देने की मांग की है। CITU चाहता है कि इन कर्मियों को भी न्यूनतम वेतन, कर्मचारी भविष्य निधि (EPF), कर्मचारी राज्य बीमा (ESI) और ग्रेच्युटी जैसे वैधानिक लाभ दिए जाएं।
संगठन का मानना है कि यह आंदोलन श्रमिक अधिकारों की रक्षा के लिए अनिवार्य है। CITU का स्पष्ट कहना है कि वे उन तमाम राष्ट्रीय नीतियों का कड़ा विरोध करेंगे जो मजदूर वर्ग के हितों को नुकसान पहुंचाती हैं। अब देखना यह होगा कि दिसंबर की शुरुआत में दिल्ली की सड़कों पर उतरने वाले इस जनसैलाब पर सरकार की क्या प्रतिक्रिया होती है।