'रिजीम चेंज' पर छिड़ी जंग: पी चिदंबरम बोले- विपक्ष का काम है सरकार को हटाना

भारतीय राजनीति में इन दिनों 'रिजीम चेंज' (सत्ता परिवर्तन) शब्द को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस छिड़ गई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम ने इस विवाद में कूदते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर पलटवार किया है। चिदंबरम ने स्पष्ट किया कि लोकतंत्र में सत्ता परिवर्तन एक सामान्य प्रक्रिया है और इस शब्द के इस्तेमाल पर भाजपा का इतना गुस्सा होना समझ से परे है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी बात रखते हुए चिदंबरम ने पूछा कि भाजपा 'रिजीम चेंज' शब्द से इतना क्यों घबरा रही है और बनावटी गुस्सा क्यों दिखा रही है? उन्होंने लोकतंत्र की बुनियादी समझ का हवाला देते हुए कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक देश में सरकार का बदलना एक नियमित बात है।
विपक्ष की जिम्मेदारी: विरोध, पर्दाफाश और सत्ता परिवर्तन
चिदंबरम ने विपक्ष की भूमिका को परिभाषित करते हुए एक बेहद दिलचस्प तर्क दिया। उन्होंने लिखा कि विपक्ष का मुख्य कर्तव्य सरकार का विरोध करना (Oppose), उसकी कमियों को उजागर करना (Expose) और अंततः उसे सत्ता से हटाना (Depose) होता है। उनके मुताबिक, इसका सीधा मतलब है कि राजनीति में विरोध किया जाए, संसद में सरकार की गलतियों का पर्दाफाश हो और चुनाव के जरिए सरकार को बदला जाए।
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कांग्रेस और उसके सहयोगियों पर गंभीर आरोप लगाए। लखनऊ में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राजनाथ सिंह ने कहा कि कुछ लोग भारत में बांग्लादेश जैसी राजनीतिक उथल-पुथल पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि युवाओं को मोहरा बनाकर अराजकता फैलाई जा रही है ताकि लोकतांत्रिक संस्थाओं को नष्ट कर सत्ता हथियाई जा सके।
गौरतलब है कि यह विवाद तब गहराया जब वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ चल रहे आंदोलनों को 'रिजीम चेंज की लड़ाई' बताया और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की अध्यक्ष नेहा बोरा ने बांग्लादेश के 'जेन जी' आंदोलन का जिक्र किया। भाजपा ने इन बयानों को चुनाव प्रक्रिया के बाहर सरकार गिराने की साजिश के तौर पर देखा है, जबकि विपक्ष इसे लोकतांत्रिक अधिकार बता रहा है।