कृषि भवन स्थित मस्जिद को हटाने की तैयारी, केंद्र ने हाईकोर्ट से कहा- सरकारी संपत्ति पर धार्मिक ढांचा गलत
केंद्र सरकार ने दिल्ली हाईकोर्ट को बताया कि सरकारी संपत्ति पर धार्मिक ढांचे का होना धर्मनिरपेक्षता के खिलाफ है, इसलिए मस्जिद हटानी होगी।

दिल्ली के कृषि भवन परिसर में स्थित करीब सौ साल पुरानी 'कदीमी मस्जिद' को लेकर केंद्र सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। केंद्र ने दिल्ली हाई कोर्ट को साफ तौर पर बताया है कि सरकारी संपत्ति पर किसी स्थायी धार्मिक ढांचे का होना नियमों के खिलाफ है और यह सरकारी सुविधाओं के धर्मनिरपेक्ष स्वरूप के साथ मेल नहीं खाता।
आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय के तहत आने वाले लैंड एंड डेवलपमेंट ऑफिस (L&DO) ने एक हलफनामे के जरिए यह बात कही है। सरकार का तर्क है कि यह जमीन पूरी तरह से सार्वजनिक संपत्ति है, जिसका उपयोग केवल प्रशासनिक और सरकारी कार्यों के लिए किया जाना चाहिए। ऐसे में इस जमीन पर किसी भी तरह का धार्मिक आरक्षण या कब्जा जायज नहीं है।
सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट और मस्जिद का विवाद
मस्जिद को हटाने की यह जरूरत सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास मास्टर प्लान के कारण पड़ी है। इस योजना के तहत प्लॉट नंबर 120 पर कॉमन सेंट्रल सचिवालय (CCS) की बिल्डिंग 4 और 5 का निर्माण होना है, जहाँ वर्तमान में कृषि भवन और शास्त्री भवन स्थित हैं। गौरतलब है कि मस्जिद की देखभाल करने वाली कमेटी ने इसे बचाने के लिए कोर्ट में याचिका दायर की थी। वहीं, दिल्ली वक्फ बोर्ड ने 1970 में इस स्थल को वक्फ संपत्ति के रूप में अधिसूचित किया था।
मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस अनीश दयाल ने सरकार से यह सवाल पूछा कि क्या सरकारी परिसरों में किसी भी समुदाय के लिए प्रार्थना स्थल या धार्मिक ढांचे बनाने पर कोई विशेष प्रतिबंध है। इसके जवाब में सरकार ने कहा कि यह मस्जिद 1940 से 'परमिसिव पजेशन' (अनुमति आधारित कब्जे) के तहत है। सरकार ने कोर्ट को सुझाव दिया कि इंडिया गेट से दो किलोमीटर के दायरे में स्थित 'शाही मस्जिद जबता गंज' नमाजियों के लिए एक वैकल्पिक विकल्प के रूप में उपलब्ध है।
अब इस संवेदनशील मामले की अगली सुनवाई 23 नवंबर, 2026 को होगी, जिस पर सबकी नजरें टिकी हैं।