दिल्ली उच्च न्यायालय में केंद्र सरकार ने दी सेंट्रल सचिवालय क्लब की मान्यता रद्द करने की सफाई

केंद्र सरकार ने दिल्ली उच्च न्यायालय को बताया है कि 107 साल पुराने सेंट्रल सचिवालय क्लब (CSC) की मान्यता रद्द करने का फैसला किसी एक घटना पर नहीं, बल्कि कई व्यवस्थागत उल्लंघनों पर आधारित है। 22 अगस्त 2026 को दायर हलफनामे में सरकार ने लगातार प्रशासनिक विफलताओं, वित्तीय अनियमितताओं और आधिकारिक निर्देशों की अनदेखी को इस कार्रवाई का मुख्य कारण बताया है। कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (DoPT) ने मूल रूप से 24 फरवरी 2026 को क्लब की मान्यता रद्द की थी। तीन सदस्यीय समिति की समीक्षा के बाद 14 जुलाई 2026 को इस फैसले को बरकरार रखा गया और 17 जुलाई 2026 को संपदा निदेशालय ने क्लब को सरकारी परिसर खाली करने का नोटिस जारी किया। क्लब की याचिका पर दिल्ली उच्च न्यायालय ने 13 अगस्त 2026 को सरकार को नोटिस जारी किया, लेकिन मान्यता रद्द करने या बेदखली के आदेश पर कोई रोक नहीं लगाई।
प्रशासनिक विफलताएं और अवैध गतिविधियां
सरकारी वकील ने बताया कि क्लब 13 जुलाई 2025 से बिना वैध रूप से गठित प्रबंधन समिति के चल रहा था क्योंकि नई चुनाव प्रक्रिया नहीं हुई थी। अतिरिक्त आरोपों में पद का दुरुपयोग, आंतरिक विवाद, सरकारी संपत्ति पर अनधिकृत कब्जा, अवैध कैंटीन चलाना और DoPT-नामित सदस्यों को सीसीटीवी निगरानी से रोकना शामिल है। सरकार ने यह भी आरोप लगाया कि इस सुविधा में अवैध जुआ शामिल था और यह कर्मचारी कल्याण का समर्थन करने में विफल रही, तथा अप्रैल 2026 तक सदस्यता घटकर केवल 338 व्यक्ति रह गई थी।
क्लब का पुराना इतिहास और कानूनी कार्यवाही
यह तीसरी बार है जब DoPT ने इस ऐतिहासिक क्लब की मान्यता रद्द की है, इससे पहले 1971 और 1983 में भी ऐसी कार्रवाई की गई थी। वर्तमान उच्च न्यायालय की कार्यवाही में वरिष्ठ अधिवक्ता दीया कपूर सेंट्रल सचिवालय क्लब का प्रतिनिधित्व कर रही हैं।